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New Delhi : दो माह ‘ग्राउंडेड’ रहने के बाद अब फिर से उड़ान भर सकेंगे तेजस लड़ाकू जेट

New Delhi: After remaining 'grounded' for two months, Tejas fighter jets can now take to the skies again

तकनीकी गड़बड़ी मिलने के बाद विमान के ब्रेक सॉफ्टवेयर को किया गया अपग्रेड
नई दिल्ली : (New Delhi)
लगभग दो महीने तक जमीन पर खड़े रहने के बाद अब फिर से तेजस लड़ाकू जेट (Tejas fighter jets) उड़ान भर सकेंगे। लगातार तीन दुर्घटनाओं के बाद ‘ग्राउंडेड’ किये गए विमानों (grounded aircraft) की जांच में कई खामियां मिली थीं, जिन्हें ठीक किये जाने के बाद वायु सेना ने उड़ान भरने की मंजूरी दी है। उड़ान पर रोक के चलते ही इसी साल 27 फरवरी को पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में हुए ‘वायु शक्ति’)(‘Vayu Shakti’) अभ्यास में स्वदेशी तेजस मार्क-1 (indigenous Tejas Mark-1) शामिल नहीं हो पाया था।

दरअसल, 07 फरवरी को एक तेजस विमान पश्चिमी मोर्चे के एक फॉरवर्ड बेस से टेक ऑफ करते समय रनवे से फिसलकर पास की मिट्टी की खाई में जा गिरा था। सिंगल-सीटर एयरक्राफ्ट (single-seater aircraft) का पायलट बच गया, लेकिन उसे चोटें आईं थी। इसी दुर्घटना के बाद भारतीय वायु सेना ने अपने तेजस लड़ाकू जेट बेड़े को जमीन पर रोक दिया, क्योंकि यह तेजस विमान की तीसरी दुर्घटना थी। इससे पहले पहली दुर्घटना मार्च 2024 में जैसलमेर के पास हुई थी, जब पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में हुए ‘वायु शक्ति’ अभ्यास में प्रदर्शन करके लौटते समय क्रैश हो गया था। दूसरा क्रैश नवंबर 2025 में हुआ था, जब जेट दुबई एयरशो (Dubai Airshow) में एक एरोबैटिक डिस्प्ले में शामिल था। इस दुर्घटना में पायलट की मौत हो गई थी।

भारतीय वायु सेना ने इसके बाद लगभग 35 एकल सीट वाले तेजस हल्के लड़ाकू विमानों के अपने पूरे बेड़े को विस्तृत तकनीकी जांच के लिए जमीन पर रोक दिया, ताकि इसकी जांच करके प्रणालीगत दोष दूर किये जा सकें। ऐसी जांच आमतौर पर तब की जाती है, जब किसी संभावित तकनीकी खराबी का शक हो। जांच के दौरान वायु सेना और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) (Hindustan Aeronautics Limited) की कमेटी ने पाया कि विमान के ब्रेक सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी की वजह से यह हादसा हुआ। विमान के ब्रेकिंग सॉफ्टवेयर में सुधार की जरूरत थी, जो किया गया।

एचएएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक डीके सुनील (HAL Chairman and Managing Director D.K. Sunil) ने बताया कि फ्लीट की पूरी जांच में पहियों को पकड़ने वाले अंडर-कैरिज की मेटलर्जी, ब्रेक लगाने के लिए इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक सिस्टम और सॉफ्टवेयर की समीक्षा की गई। आधुनिक जेट लड़ाई और उड़ान के लिए अपने ऑन-बोर्ड मिशन कंप्यूटर पर बहुत ज़्यादा निर्भर करते हैं। इसमें कंप्यूटर-एडेड फायरिंग, टारगेटिंग, रडार सिग्नेचर की प्रोसेसिंग और ऑपरेशन शामिल हैं। विमान को नए सॉफ्टवेयर कोड सीक्वेंस की जरूरत नहीं थी, इसलिए सिर्फ अपग्रेड किया गया है। सॉफ्टवेयर को ठीक और अपडेट करने के बाद फ्लीट को फिर से उड़ान भरने देने से पहले कई तरह के परीक्षण किये गए हैं। इसके बाद वायु सेना ने फाइटर जेट्स को उड़ान भरने की मंजूरी दे दी है।

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