
नई दिल्ली : (New Delhi) पश्चिम एशिया संकट के बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) (MPC) की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक दूसरे दिन भी चल रही है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने सोमवार को इस बैठक की शुरुआत की। इस बैठक के फैसले की घोषणा बुधवार को रिजर्व बैंक गवर्नर संजय मल्होत्रा (Reserve Bank Governor Sanjay Malhotra) सुबह 10 बजे करेंगे।
आरबीआई ने मंगलवार को ‘एक्स’ पोस्ट पर जारी एक बयान में कहा कि मौद्रिक नीति की घोषणा 8 अप्रैल, 2026 को निर्धारित है। केंद्रीय बैंक ने बताया कि गवर्नर संजय मल्होत्रा (Governor Sanjay Malhotra) बुधवार को सुबह 10 बजे बैठक के नतीजों की घोषणा करेंगे।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में चल रही यह बैठक एक मुश्किल समय में हो रही है, क्योंकि वैश्विक तनाव और तेल की बढ़ती कीमतों ने केंद्रीय बैंक के काम को और भी जटिल बना दिया है। पश्चिम एशिया संकट के बीच आरबीआई की चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पहली तीन दिवसीय समीक्षा बैठक चल रही है, यह समीक्षा बैठक 8 अप्रैल तक चलेगी। अर्थशास्त्रियों ने रेपो रेट 5.25 फीसदी पर बने रहने की संभावना जताई है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मुद्रा संबंधी दबावों के बीच आर्थिक परिदृश्य का आकलन करने के लिए आरबीआई की मौद्रिक समीक्षा बैठक में केंद्रीय बैंक इस बार भी रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर यथावत बनाए रखेगा। इस समीक्षा बैठक में नीतिगत ब्याज दर रेपो रेट और महंगाई पर फैसला लिया जाएगा।
रेपो रेट का अर्थ
रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर आरबीआई बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है। इसका सीधा प्रभाव लोन, ईएमआई, बचत और निवेश पर पड़ता है। इससे पहले पिछले वित्त वर्ष के फरवरी 2026 में हुई अंतिम एमपीसी बैठक में भी रेपो रेट 5.25 फीसदी पर स्थिर रखा गया था। हालांकि, रिजर्व बैंक (Reserve Bank) फरवरी, 2025 से अब तक रेपो रेट में कुल 125 फीसदी की कटौती कर चुका है। आखिरी कटौती दिसंबर, 2025 में हुई थी, जब रेपो रेट को 0.25 फीसदी घटाकर 5.25 फीसदी किया गया था।


