
धीरज सिंह
मुंबई : (Mumbai) महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में ‘मुख्यमंत्री मेरी लाडली बहन योजना’ (‘Chief Minister’s Meri Ladli Bahen Yojana’) को लेकर एक बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में 71 लाख महिलाओं के अपात्र होने की खबर ने हड़कंप मचा दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन महिलाओं को पिछले 20 महीनों से लगातार आर्थिक सहायता मिलती रही, जिससे सरकारी खजाने पर 21,300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
बिना जांच के बांटे पैसे, अब बढ़ी मुसीबत
जुलाई 2024 में जब महायुति सरकार (Mahayuti government) ने इस योजना की शुरुआत की थी, तब लक्ष्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था। सरकार को 2.47 करोड़ आवेदन मिले और बिना किसी प्रारंभिक कड़ी जांच के सभी के खातों में 1,500 रुपये प्रति माह ट्रांसफर करना शुरू कर दिया गया। इसी जल्दबाजी ने धांधली का रास्ता साफ कर दिया।
ई-केवाईसी ने खोली पोल
जब खजाने पर दबाव बढ़ा, तो नवंबर 2024 से लाभार्थियों का सत्यापन शुरू हुआ। जांच में सामने आया कि कुल 1.90 करोड़ महिलाओं ने ई-केवाईसी प्रक्रिया (e-KYC process) में भाग लिया। इनमें से केवल 1.75 करोड़ महिलाएं ही नियमों के हिसाब से पात्र पाई गईं। करीब 71 लाख महिलाएं अपात्र निकलीं, जो नियमों को ताक पर रखकर लाभ ले रही थीं।
मंत्री आदिती तटकरे ने मानी गड़बड़ी की बात
आंकड़ों के मुताबिक, इन 71 लाख अपात्र महिलाओं को हर महीने करीब 1,065 करोड़ रुपये दिए जा रहे थे। पिछले 20 महीनों के दौरान यह राशि जुड़कर 21,300 करोड़ रुपये हो गई। यह वह पैसा है जो राज्य के विकास कार्यों में खर्च हो सकता था, लेकिन प्रशासनिक ढिलाई की भेंट चढ़ गया। महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे (Aditi Tatkare, the Minister for Women and Child Development) ने स्वीकार किया है कि इतनी बड़ी संख्या में अपात्र लोगों ने योजना का लाभ लिया है। सरकार ने अब नरमी बरतते हुए इन महिलाओं को 30 अप्रैल 2026 तक अपनी ई-केवाईसी पूरी करने या अपनी पात्रता साबित करने का अंतिम मौका दिया है। इसके बाद उनके खाते पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे।


