
नई दिल्ली : (New Delhi) पश्चिम एशिया में जारी तनाव (ongoing tensions in the Middle East) के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) लगातार बिकवाल (सेलर) की भूमिका में बने हुए हैं। मार्च में अभी तक विदेशी निवेशक बिकवाली कर भारतीय शेयर बाजार (Indian stock market) से 88,180 करोड़ रुपये यानी लगभग 9.60 अरब डॉलर की निकासी कर चुके हैं। मार्च के तीसरे सप्ताह तक हुई बिकवाली के आंकड़ों को मिला कर साल 2026 में विदेशी निवेशक अभी तक घरेलू शेयर बाजार से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी कर चुके हैं।
इससे पहले फरवरी के महीने में विदेशी निवेशकों ने घरेलू शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी, जबकि जनवरी के महीने में विदेशी निवेशकों ने घरेलू शेयर बाजार से 35,962 करोड़ रुपये की निकासी की थी। इस तरह विदेशी निवेशक जनवरी 2026 से लेकर मार्च 2025 की तीसरे सप्ताह के अंत यानी 20 मार्च 2025 तक भारतीय शेयर बाजार से कुल 1,01,527 करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं।
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) (National Securities Depository Limited) के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2025 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक घरेलू शेयर बाजार के हर कारोबारी सत्र में बिकवाल की भूमिका निभाते रहे। राहत की बात यही रही कि विदेशी निवेशकों ने जहां लगातार बिकवाली का दबाव बनाया, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशक (Domestic Institutional Investors) (डीआईआई) बाजार को सहारा देने की कोशिश में लगातार खरीददारी करते रहे। मार्च में पहले तीन सप्ताह के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशक अभी तक शेयर बाजार में कुल 1,01,168.60 करोड़ रुपये की खरीदारी कर चुके हैं। घरेलू निवेशकों की ओर से लगातार की जा रही आक्रामक खरीदारी के कारण वैश्विक स्तर पर निगेटिव सेंटीमेंट्स होने के बावजूद घरेलू शेयर बाजार में अधिक गिरावट नहीं आई है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा घरेलू शेयर बाजार में जमकर की जा रही बिकवाली की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में जारी जंग को माना जा सकता है। इस जंग के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल होने की आशंका बन गई है। इसी तरह हॉर्मुज स्ट्रेट के रास्ते मालवाहक जहाजों की आवाजाही ठप हो जाने की वजह से कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई है। इसी तरह डॉलर इंडेक्स में आई तेजी के कारण रुपये ऐतिहासिक गिरावट का शिकार हो गया है। वहीं, अमेरिकी बॉन्ड पर बढ़ती यील्ड के कारण डॉलर बेस्ड असेट्स के प्रति निवेशकों का रुझान बढ़ गया है। इस वजह से भी विदेशी निवेशक भारत जैसे देशों के बाजार से पैसा निकालने में जुटे हुए हैं।
धामी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत धामी (Prashant Dhami, Vice President of Dhami Securities) का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक बाजार में लगातार बढ़ रही कमजोरी और कच्चे तेल की कीमत में आई तेजी के कारण भारत के आर्थिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। इस वजह से भी विदेशी निवेशक फिलहाल भारतीय बाजार से अपना पैसा सुरक्षित निकालने की कोशिश में जुटे हुए हैं।


