
ब्रुसेल्स/लंदन : (Brussels/London) अमेरिका के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार गैर-सरकारी संगठन ह्यूमन राइट्स (international human rights non-governmental organization) वॉच ने कहा है कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu) हंगरी की सीमा में प्रवेश करते हैं तो उन्हें गिरफ़्तार कर लेना चाहिए। नेतन्याहू की यह यात्रा शनिवार से शुरू होने वाली है और यह हंगरी में 12 अप्रैल को होने वाले आम चुनावों से कुछ हफ़्ते पहले हो रही है।
तुर्किए की संवाद समिति अनाडाेलू एजेंसी (Anadolu Agency) (AA) ने ह्यूमन राइट्स वॉच के हवाले से बताया कि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (International Criminal Court) (ICC) ने 21 नवंबर 2024 को इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और तत्कालीन रक्षामंत्री योव गैलेंट के खिलाफ गिरफ़्तारी वारंट जारी किया था। यह वारंट गाजा पट्टी में 8 अक्टूबर 2023 से कथित तौर पर मानवता के खिलाफ किए गए अपराधों और युद्ध अपराधों के मामले में जारी किया गया था। आईसीसी के सदस्य देशों के लिए यह अनिवार्य है कि यदि ये दोनों उनकी सीमा में प्रवेश करते हैं तो वे उन्हें गिरफ़्तार करें।
ह्यूमन राइट्स वॉच में अंतरराष्ट्रीय न्याय शोधकर्ता एलिस ऑटिन (Alice Autin) ने कहा कि आईसीसी छोड़ने के अपने कदम के बावजूद हंगरी अभी भी एक सदस्य देश है और न्यायालय द्वारा वांछित व्यक्तियों को गिरफ़्तार करने और उन्हें सौंपने के लिए बाध्य है।
नेतन्याहू की हंगरी की प्रस्तावित यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच करीब तीन हफ्ताें से युद्ध जारी है। इसके जवाब में ईरान इजराइल तथा खाड़ी देशों पर हमले कर रहा है। मार्च की शुरुआत में इज़राइली सेना ने लेबनान में अपने हमले तेज़ कर दिए थे और दक्षिणी लेबनान तथा बेरूत के दक्षिणी उपनगरों के बड़े इलाक़ों को तत्काल खाली करने का आदेश दिया था।
नेतन्याहू इससे पहले अप्रैल 2025 में हंगरी की यात्रा पर गए थे और तब उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया गया था। हंगरी ने औपचारिक रूप से आईसीसी संधि से हटने के अपने इरादे की घोषणा कर दी है, जो इस 2 जून से प्रभावी होगी। इस कदम की अंतरराष्ट्रीय वकीलों और नागरिक समाज (international lawyers and civil society groups) द्वारा आलोचना की जा रही है।
ह्यूमन राइट्स वॉच ने लेबनान, गाज़ा और ईरान के ख़िलाफ़ चल रहे इज़राइली सैन्य अभियानों की भी निंदा की, और “क़ानून के शासन का सम्मान करने तथा न्याय के विश्वसनीय मार्गों का समर्थन करने की तत्काल आवश्यकता” पर ज़ोर दिया। संगठन ने यूराेपियन यूनियन और आईसीसी के सदस्य देशों से भी अपील की कि वे हंगरी पर दबाव डालें ताकि वह अपना फ़ैसला वापस ले और न्यायालय के साथ सहयोग करे।
ऑटिन ने कहा कि हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन (Hungarian Prime Minister Viktor Orbán) एक बार फिर नेतन्याहू के लिए ‘रेड कार्पेट’ बिछाने की तैयारी में हैं, जबकि वह उन्हें गिरफ़्तार करने के लिए बाध्य है। यूराेपियन यूनियन की चुप्पी और लगातार निष्क्रियता से एक ख़तरनाक संदेश जाने का जोखिम है कि वह इन कृत्यों को मौन सहमति दे रहा है, जबकि इज़राइली सरकार लगातार अत्याचारों के लिए ज़िम्मेदार बनी हुई है।
ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि बढ़ती शत्रुता और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों तथा मानवीय कानूनों के गंभीर उल्लंघन के बढ़ते जोखिम, कानून के शासन का सम्मान करने और आईसीसी जैसे न्याय के विश्वसनीय माध्यमों का समर्थन करने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
अप्रैल 2025 में नेतन्याहू ने हंगरी की यात्रा की थी, लेकिन हंगरी के अधिकारियों ने उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया था। जुलाई में आईसीसी के जजों ने पाया कि हंगरी कोर्ट के साथ सहयोग करने की अपनी ज़िम्मेदारी पूरी करने में नाकाम रहा और उन्होंने इस निष्कर्ष को अपनी निगरानी संस्था, ‘असेंबली ऑफ़ स्टेट्स पार्टीज’ को भेज दिया। दिसंबर में अपने सालाना सत्र के दौरान, असेंबली ने इस न्यायिक निष्कर्ष पर ध्यान तो दिया लेकिन कोई और ठोस कदम उठाने में नाकाम रही।
अप्रैल 2025 की यात्रा के दौरान हंगरी के प्रधानमंत्री ओर्बन ने घोषणा की कि उनकी सरकार आईसीसी संधि से अलग होने का इरादा रखती है। दो जून को हंगरी के अधिकारियों ने औपचारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र के महासचिव को हंगरी के अलग होने की सूचना दी। यह फ़ैसला दो जून 2026 से लागू हो जाएगा। हंगरी के अंतरराष्ट्रीय वकीलों और नागरिक समाज संगठनों ने आईसीसी से अलग होने के इस फ़ैसले की कड़ी आलोचना की।
यूरोपीय यूनियन (European Union) (EU) के पास एक स्पष्ट कानूनी ढांचा मौजूद है, जो आईसीसी के साथ उसके संबंधों और उसे दिए जाने वाले समर्थन को नियंत्रित करता है। इसके बावजूद, ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ (Human Rights Watch) का कहना है कि ईयू के सदस्य देश और उसकी संस्थाएं, आईसीसी को कमज़ोर करने की हंगरी की कोशिशों और ‘कानून के शासन’ पर ओर्बन के व्यापक हमलों को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाने में नाकाम रही हैं।
संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार गाजा के पुनर्निर्माण की लागत लगभग 70 अरब डॉलर होगी। गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम के बावजूद इजराइल ने अपने रोज़ाना के हमले जारी रखे हैं और इस युद्धविराम के बाद से कम से कम 677 फ़िलिस्तीनियों को मार डाला है और 1,813 अन्य को घायल कर दिया है।


