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Mumbai : महिला किसानों के लिए कानूनी कवच

मुंबई : (Mumbai) महाराष्ट्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 के (International Year of Women Farmers (2026), the Maharashtra government) अवसर पर एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए महिला किसानों के सशक्तिकरण के लिए एक विशेष विधेयक लाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए राज्य के कृषि विभाग (State Agriculture Department) ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जो महिला किसानों के अधिकारों और सर्वांगीण विकास के लिए कानूनी मसौदा तैयार करेगी। राज्य सरकार द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार, इस 9 सदस्यीय समिति का नेतृत्व ‘नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी परियोजना’ (Nanaji Deshmukh Krishi Sanjivani Project) के निदेशक परिमल सिंह करेंगे। समिति में कृषि आयुक्त सूरज मांढरे और पुणे की ‘यशदा’ संस्था के शेखर गायकवाड़ (Agriculture Commissioner Suraj Mandhare and Shekhar Gaikwad from Pune’s ‘YASHADA’ institute) जैसे अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है, ताकि कानून का मसौदा व्यावहारिक और प्रभावी बने।

सशक्तिकरण के लिए बनेगा नया कानून
इस प्रस्तावित विधेयक का मुख्य लक्ष्य महिला किसानों को केवल ‘मजदूर’ के बजाय ‘किसान’ के रूप में पहचान दिलाना और उन्हें भूमि अधिकार, ऋण सुविधा, और सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता दिलाना है। यह एक सर्वसमावेशीय (Inclusive) विधेयक होगा, जो खेती के साथ-साथ पशुपालन और संबंधित क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं को भी कवर करेगा।

विशेषज्ञों की ली जाएगी सलाह
समिति को यह अधिकार दिया गया है कि वे मसौदा तैयार करते समय कृषि विशेषज्ञों, कानूनी जानकारों, सामाजिक संगठनों और अन्य हितधारकों (Partners) से विस्तार से चर्चा करें। समिति में ‘विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी’ और ‘एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन’ (‘M.S. Swaminathan Research Foundation’) के प्रतिनिधियों को भी रखा गया है ताकि तकनीकी बारीकियों का ध्यान रखा जा सके। सरकार ने इस कार्य को गति देने के लिए एक सख्त समय सीमा तय की है। समिति को अपना पूरा मसौदा 7 अप्रैल 2026 तक सरकार को सौंपना होगा। इससे पहले 11 मार्च को विधानभवन में हुए विशेष चर्चा सत्र में सभी राजनीतिक दलों ने महिला किसानों के लिए अलग कानून बनाने की जरूरत पर सहमति जताई थी।

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