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Mumbai : 15 साल बाद मिला न्याय

बॉम्बे हाई कोर्ट ने ट्रेन हादसे के पीड़ितों को 8-8 लाख मुआवजा देने का दिया आदेश
मुंबई : (Mumbai)
बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने लोकल ट्रेन से गिरकर हुई दो अलग-अलग मौतों के मामलों में रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल (Railway Claims Tribunal) के फैसलों को रद्द करते हुए मृतकों के परिजनों को राहत दी है। अदालत ने मृतक महिला की बेटी और मृतक पुरुष की विधवा को ब्याज सहित 8-8 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।

‘यात्री नहीं’ मानने का तर्क खारिज
न्यायमूर्ति जितेंद्र जैन (Justice Jitendra Jain) की एकल पीठ ने कहा कि रेलवे द्वारा यह साबित नहीं किया जा सका कि मृतक अनाधिकृत रूप से ट्रैक पार कर रहे थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र केवल चोट और मृत्यु का कारण बताते हैं, लेकिन यह नहीं दर्शाते कि हादसा ट्रेसपासिंग के कारण हुआ था। ऐसे में ट्रिब्यूनल का यह निष्कर्ष गलत माना गया।

कोरिना डिसूजा मामले में अहम टिप्पणी
कोरिना वैलेंटिना डिसूजा (Corina Valentina D’Souza) की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने माना कि मृतक के पिता द्वारा पुलिस को दिया गया प्रारंभिक बयान महत्वपूर्ण साक्ष्य है। ट्रिब्यूनल ने 2014 में इस मामले को ‘अतिक्रमण’ बताकर खारिज कर दिया था, जबकि अदालत ने इसे ट्रेन से गिरने की दुर्घटना माना और मुआवजे का हकदार बताया।

श्यामल साल्वी मामले में भी राहत
इसी तरह श्यामल सचिन साल्वी (Shyamal Sachin Salvi) के मामले में उनकी बेटी रजनी रविंद्र पोल की याचिका को भी स्वीकार किया गया। अदालत ने कहा कि केवल चोट के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मृतक ट्रैक पार कर रहा था। साल्वी के पास वैध सीजन पास था और उनकी मौत ट्रेन से गिरने के कारण हुई मानी गई। अदालत ने 12 सप्ताह के भीतर मुआवजा देने का निर्देश दिया।

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