spot_img

New Delhi : महुआ मोइत्रा केस में सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस किया जारी

New Delhi: Supreme Court Issues Notice in Mahua Moitra Case

दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के एक हिस्से पर रोक
नई दिल्ली : (New Delhi)
सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा (Trinamool Congress MP Mahua Moitra) से जुड़े कथित कैश-फॉर-क्वेरी घोटाले के मामले (‘Cash-for-Query’ scam) में अहम आदेश दिया। अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के 19 दिसंबर 2025 के फैसले के एक हिस्से पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह वही हिस्सा था जिसमें लोकपाल से कहा गया था कि वह एक महीने के भीतर सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने की मंजूरी देने पर दोबारा विचार करे।

मामले में इन्हें जारी किया गया नोटिस
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची (Chief Justice Surya Kant and Justice Joymalya Bagchi) की बेंच ने इस मामले में महुआ मोइत्रा, सीबीआई और शिकायतकर्ता भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (BJP MP Nishikant Dubey) को नोटिस जारी किया है। यह याचिका लोकपाल ने दायर की थी, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट की उस व्याख्या को चुनौती दी गई है जिसमें कहा गया था कि लोकपाल कानून के तहत चार्जशीट दाखिल करने और अभियोजन चलाने के लिए अलग-अलग मंजूरी का प्रावधान नहीं है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने रद्द की थी लोकपाल की मंजूरी
दरअसल, 19 दिसंबर 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट ने लोकपाल द्वारा दी गई उस मंजूरी को रद्द कर दिया था, जिसके आधार पर सीबीआई महुआ मोइत्रा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करना चाहती थी। हाईकोर्ट का कहना था कि लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम (Lokpal and Lokayuktas Act), 2013 के तहत मंजूरी एक ही बार में दी जाती है, यानी चार्जशीट और अभियोजन के लिए अलग-अलग अनुमति का प्रावधान नहीं है।लोकपाल ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान अदालत में यह सवाल उठा कि क्या जांच एजेंसी को पहले चार्जशीट दाखिल करने और बाद में मुकदमा चलाने के लिए अलग-अलग मंजूरी की जरूरत होती है या नहीं।

अदालत ने कहा कि कानून की इन धाराओं की सही व्याख्या करना जरूरी है और इसके लिए लोकपाल कानून, भ्रष्टाचार निवारण कानून (Prevention of Corruption Act) और नई आपराधिक प्रक्रिया (BNSS) को साथ-साथ समझना होगा। यह पूरा मामला उस आरोप से जुड़ा है कि महुआ मोइत्रा ने एक कारोबारी दर्शन हिरानंदानी से पैसे और महंगे उपहार लेकर संसद में सवाल पूछे थे। सीबीआई ने मार्च 2024 में इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी और बाद में अपनी जांच रिपोर्ट लोकपाल को सौंप दी थी। आरोप यह भी है कि मोइत्रा ने अपने लोकसभा लॉग-इन क्रेडेंशियल्स भी साझा किए थे, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल उठे।

मामले में अब आगे क्या?
अब सुप्रीम कोर्ट इस बात की गहराई से जांच करेगा कि लोकपाल कानून के तहत जांच एजेंसियों को चार्जशीट और अभियोजन के लिए किस तरह की मंजूरी जरूरी है। इस फैसले का असर सिर्फ इस केस पर ही नहीं, बल्कि भविष्य में लोकपाल से जुड़े कई मामलों की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।

Explore our articles