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Kolkata : राजभवन के सामने चार घंटे तक धरने पर बैठ सकते हैं शुभेंदु, राज्य सरकार ने कहा – आपत्ति नहीं है

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कोलकाता : (Kolkata) राजभवन के सामने भाजपा के धरना कार्यक्रम पर राज्य को कोई आपत्ति नहीं है। राज्य सरकार ने गुरुवार को इसकी जानकारी कलकत्ता हाई कोर्ट को दी है। गुरुवार को राज्य के महाधिवक्ता (एजी) किशोर दत्ता (Kishore Dutta) ने अदालत को बताया कि धरना पर कोई आपत्ति नहीं है। वह कार्यक्रम अगले रविवार को चार घंटे तक किया जा सकता है। राज्य के एजी ने राज्य के विपक्षी नेता शुभेंदु अधिकारी द्वारा दायर मामले में ये जवाब दाखिल किया है। हालांकि, शुभेंदु के वकील ने कहा कि उस तारीख पर कार्यक्रम संभव नहीं है। इसके बाद जस्टिस अमृता सिन्हा ने टिप्पणी की कि बार-बार सुनवाई टालना ठीक नहीं है।

शुभेंदु के वकील ने कलकत्ता उच्च न्यायालय को बताया कि पुलिस ने पिछले साल अक्टूबर में राजभवन के सामने तृणमूल के कार्यक्रम के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। जस्टिस सिन्हा ने सवाल उठाया कि कार्रवाई क्यों नहीं की गई ? गुरुवार को हाई कोर्ट में शुभेंदु के वकील बिलबादल भट्टाचार्य ने कहा, ”राज्य एजी कह रहे हैं कि अनुच्छेद 144 का उल्लंघन कर राजभवन के सामने तृणमूल के कार्यक्रम के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। गुरुवार को मुख्यमंत्री ने नवान्न में कैमरे के सामने कहा कि जब तृणमूल ने कार्यक्रम आयोजित किया था, तब धारा 144 नहीं थी। यदि हां, तो कौन सा सही है?”

इसके बाद जस्टिस सिन्हा ने कहा कि राजनेताओं पर विश्वास न करें। राज्य एजी ने जो कहा वह सही है।

शुभेंदु के वकील ने कहा कि अगर राज्य अनुमति दे भी दे तो भी अगले रविवार को कार्यक्रम नहीं हो सकेगा क्योंकि रविवार को पहले से कार्यक्रम तय हैं। उस दिन प्रधानमंत्री की ”मन की बात” है, इसलिए राजभवन के सामने कार्यक्रम नहीं हो सकता। इसे अगले रविवार को किया जा सकता है। एजी ने पलटवार करते हुए कहा कि उस रविवार को कार्यक्रम हो सकता है या नहीं, इसके लिए हमें दोबारा प्रशासन से पूछना होगा।

इसके बाद जस्टिस सिन्हा ने कहा कि इस तरह बार-बार मामले की सुनवाई टालना ठीक नहीं है। इन राजनीतिक मामलों की वजह से कई मामलों की सुनवाई को नुकसान हो रहा है। कोर्ट को कहना पड़ा कि नेताओं की बातों पर यकीन करने की जरूरत नहीं है।

उल्लेखनीय है कि चुनाव बाद हिंसा के खिलाफ राजभवन के सामने शुभेंदु अधिकारी प्रदर्शन करना चाहते थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया जिसके बाद हाईकोर्ट में याचिका लगी है।