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Prayagraj : पंजीकृत डीलर की मृत्यु पंजीकरण वैध है, तो परिवार समूह पॉलिसी के तहत बीमा धन का हकदारः हाईकोर्ट

प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पंजीकृत डीलर की मृत्यु की तारीख पर पंजीकरण वैध है तो परिवार समूह बीमा पॉलिसी के तहत बीमा धन का हकदार होगा।

कोर्ट ने कहा कि मृतक के पास उत्तर प्रदेश मूल्य वर्धित कर अधिनियम (यूपीवीएटी) 2008 के तहत पंजीकरण प्रमाणपत्र मौजूद था। सम्बंधित अधिकारियों ने इस बात को नजरअंदाज कर दिया और सामूहिक बीमा पॉलिसी का लाभ देने से मना कर दिया, जो सही नहीं है। कोर्ट ने मामले के प्रतिवादियों को किसी और कानूनी बाधा के न होने पर प्रक्रिया पूरी कर एक महीने में बीमा राशि के भुगतान का आदेश दिया।

यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति सुरेंद्र सिंह प्रथम की खंडपीठ ने फतेहपुर की रीना रानी रस्तोगी की याचिका पर दिया है। याची की ओर से दावा किया गया कि उसका मृत पति यूपीवीएटी अधिनियम के तहत एक पंजीकृत डीलर था और उसकी मृत्यु की तारीख पर भी पंजीकरण जारी था। इस आधार पर सामूहिक बीमा पॉलिसी के तहत भुगतान की मांग की गई। लेकिन वाणिज्यिक कर आयुक्त द्वारा उसे खारिज कर दिया गया। कहा गया कि मृतक ने पंजीकरण रद्द करने के लिए पहले ही आवेदन दिया था। उस पर कार्रवाई भी की गई थी। हालांकि, आदेश उसकी मृत्य के बाद अपलोड की गई।

याची की ओर से कहा गया कि पंजीकरण उसके पति की मृत्यु के बाद सरेंडर कर दिया गया था। लेकिन, उसका पति मृत्यु की तिथि पर एक पंजीकृत डीलर था। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों ने मृतक डीलर द्वारा दिए गए पंजीकरण को रद्द करने के आवेदन पर विचार किए बिना, पहले से मौजूद पंजीकरण को न देखकर खुद को गलत दिशा में निर्देशित किया, जो कि सही नहीं था। कोर्ट ने मामले में प्रतिवादी-अधिकारियों को फिर से विचार कर महीने भर में बीमा राशि के भुगतान का आदेश दिया।

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