ढोल नगाड़ों के साथ लाड़ली को ले गए घर, मिठाई बांटी
मुरैना : एक समय ऐसा भी था कि चंबल अंचल में लड़कियों के जन्म पर घर में शोक मनाया जाता था, लेकिन यह धारणा अब बदलने लगी है। लोग बेटों की तरह ही बेटियों को चाहने लगे हैं। मुरैना जिले में अब लड़कियों को बोझ नहीं समझा जाता और जन्म लेने पर ढोल नगाड़े बजाकर खुशियां मनाई जाती हैं तथा मिठाई वितरित की जाती है। ऐसा ही एक मामला शहर की गायत्री कॉलोनी में गुरुवार की सुबह देखने को मिला।
जानकारी के अनुसार गायत्री कॉलोनी निवासी देवेंद्र सिंह राजपूत के परिवार में पिछले 40 वर्षों से किसी भी बच्ची ने जन्म नहीं लिया, जिससे उनके घर में बहन बेटी की कमी काफी खल रही थी। श्री राजपूत ने बताया कि वह दो भाई है तथा मामा का लडका भी उनके साथ रहता है, इसलिए तीन भाई है और सभी की शादी हो गई है। वहीं मामा के चार लडके थे, उनके भी कोई बच्ची नहीं है। पूरे परिवार में लडके ही लडके थे। स्वयं उनके घर में बहन नहीं है, इस कारण बेटी की कमी पूरे परिवार को काफी खल रही थी। देवेंद्र की पत्नी गर्भवती थी और बुधवार को उसकी डिलीवरी हुई तथा उसने एक लक्ष्मी को जन्म दिया। लडकी ने जन्म लिया तो देवेंद्र के परिवार में खुशियां छा गई। गुरुवार की सुबह देवेंद्र राजपूत एवं उनके परिवार ने कार सजाई और उसे अस्पताल ले गए तथा वहां से पत्नी को डिस्चार्ज कर कर ढोल नगाड़ों के साथ कार में घर तक ले गए। घर पहुंचने पर बच्ची का लक्ष्मी की तरह विधि विधान से स्वागत किया गया। इस अवसर पर पूरे मोहल्ले में मिठाई वितरित की गई।


