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Mumbai : मेट्रो-3 में तकनीकी खराबी के बाद प्रशासन में हड़कंप

Mumbai: Administration in a Flurry Following Technical Glitch on Metro-3 Line

आखिरकार सुरंग में मोबाइल नेटवर्क शुरू करने का फैसला
मुंबई : (Mumbai)
मेट्रो-3 (Aqua Line) में शुक्रवार को हुई गंभीर तकनीकी खराबी के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। घटना के बाद आखिरकार सुरंग के भीतर निर्बाध मोबाइल नेटवर्क (mobile network) सेवा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। शुक्रवार को तकनीकी खराबी के कारण मेट्रो ट्रेन करीब एक घंटे से अधिक समय तक सुरंग में फंसी रही, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस घटना के बाद मेट्रो प्रशासन की जमकर आलोचना हुई, जिसके चलते अब भारती एयरटेल, रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडिया (Bharti Airtel, Reliance Jio, and Vodafone Idea) के माध्यम से मेट्रो-3 मार्ग पर मोबाइल नेटवर्क सेवा शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है।

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर धारावी से चर्चगेट की ओर जा रही मेट्रो तकनीकी खराबी के कारण सुरंग में ही रुक गई। करीब 75 मिनट तक यात्री भूमिगत फंसे रहे। सुरंग में मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से यात्रियों का बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह टूट गया। कई यात्रियों ने घबराहट, दम घुटने जैसी स्थिति और असहाय महसूस करने की शिकायत की। कुछ यात्रियों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से पर्याप्त जानकारी और सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई।

दिव्यांग यात्री और वरिष्ठ पत्रकार दीपक कैतके ने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा, “आपातकालीन स्थिति में यात्रियों को कम से कम अपने परिवार से संपर्क करने की सुविधा मिलनी चाहिए। नेटवर्क नहीं होने के कारण हम पूरी तरह बाहरी दुनिया से कट गए थे। मेट्रो जैसी आधुनिक व्यवस्था में यह बेहद गंभीर खामी है।”

घटना के कुछ ही घंटों बाद मेट्रो रेल प्रशासन (Metro Rail administration) ने सुरंग के भीतर मोबाइल नेटवर्क सेवा शुरू करने के लिए दूरसंचार कंपनियों को अनुमति देने का फैसला किया। बताया जा रहा है कि भूमिगत कॉरिडोर में इन-बिल्डिंग सॉल्यूशन (In-Building Solution) (IBS) प्रणाली के जरिए निर्बाध मोबाइल सेवा उपलब्ध कराने का काम जल्द शुरू किया जाएगा।

गौरतलब है कि मेट्रो प्रशासन और दूरसंचार कंपनियों के बीच तकनीकी और व्यावसायिक अड़चनों के कारण यह काम कई महीनों से लंबित था। लेकिन यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी गंभीर घटना सामने आने के बाद अब इस मुद्दे को प्राथमिकता दी गई है।

हालांकि इस घटना ने कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। मेट्रो-3 शुरू हुए कई महीने बीत चुके हैं और लाखों यात्री रोज इस सेवा का उपयोग कर रहे हैं, फिर भी इतनी बुनियादी सुविधा की अनदेखी क्यों की गई?

आपातकालीन स्थिति में मोबाइल नेटवर्क कोई विलासिता नहीं, बल्कि सुरक्षा की अनिवार्य आवश्यकता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या हर बार किसी गंभीर घटना के बाद ही प्रशासन जागेगा? और मेट्रो शुरू करते समय ही ऐसी मूलभूत सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

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