बोकारो : गोमिया प्रखंड के खखंडा गांव निवासी गिरधारी महतो की पुत्री खुशबू कुमारी (25) बचपन से ही दिव्यांगता की शिकार थी। वह चलने-फिरने में लाचार थी। 24 घंटे बिस्तर में ही रहती थी।
खुशबू के पिता खेतीबाड़ी एवं मजदूरी कर किसी तरह अपने परिवार का पेट पालते थे और उसी में से थोड़े-थोड़े पैसे बचाकर वे अपने पुत्री खुशबू का इलाज भी करवाते थे। पिता द्वारा इलाज करवाने के बावजूद खुशबू की स्थिति दिनों दिन बिगड़ती चली जा रही थी।
कुछ समय बाद खुशबू को सरकार की तरफ से दिव्यांग पेंशन भी मिलने लगा लेकिन वर्ष 2018 में आधार कार्ड के रूप में सरकारी सिस्टम फॉलो नहीं होने के कारण खुशबू को पेंशन मिलना भी बंद हो गया। लाचार पिता ने खुशबू का आधार कार्ड बनवाने के लिए प्रखंड मुख्यालय गोमिया का चक्कर लगाना शुरू कर दिया। पंचायत के प्रतिनिधियों के द्वारा भी खुशबू का आधार कार्ड बनवाने का काफी प्रयास किया गया लेकिन आधार कार्ड नहीं बन पाया। एक समाजसेवी ने सूबे के परिवहन एवं कल्याण मंत्री चंपई सोरेन को एक्स पोस्ट के माध्यम से खुशबू की गंभीर हालत के बारे में जानकारी दी। तब मंत्री चंपई ने भी मामले में गंभीरता दिखाते हुए बोकारो के उपायुक्त को निर्देश देते हुए कहा था कि खुशबू को सामाजिक सुरक्षा एवं समाज कल्याण की अधिकतम योजनाओं से जोड़ने का प्रयास करें। अगर खुशबू बेटी को चिकित्सा या किसी अन्य मदद की जरूरत हो तो उपलब्ध करवाएं।
इसके बावजूद खुशबू को किसी भी तरह के सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया। आधार नहीं रहने के कारण खुशबू को पेंशन मिलना भी बंद हो गया। आखिरकार सरकारी सिस्टम के आगे लाचार खुशबू की बुधवार की सुबह मौत हो गई।
इस संबंध में गोमिया के बीडीओ कपिल कुमार ने कहा कि जिला से आदेश मिलने के बाद तीन-चार दिन पहले ही प्रखंड से आधार कार्ड बनवाने की मशीन लेकर ऑपरेटर खुशबू के यहां गया और आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया कर दी थी। संभवतः 12 से 15 दिनों में खुशबू का आधार कार्ड बन जाता। आधार कार्ड बनने के साथ ही खुशबू को सभी तरह के सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने लगता।


