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कव‍िता : दिखने में तो यह सड़क बाज़ार है

कलाकृत‍ि : सुहानी जैन

दिखने में तो यह सड़क बाज़ार है
पर इसे लिखने में बहुत सन्नाटा आ रहा है
भीड़ में से डर एकान्त में से
डर निकलता आ रहा है
चलने भर वाले जितने रास्ते
इस सड़क से गुजरते हैं
देखता है कि वे
मेरे किसी दोस्त के दो पैर हैं
सड़क पर मिटे हुए
रास्ते एकदम खुलने लगते हैं
दोस्त सा कोई सन्नाटा अन्त तक के
लिए साथ चलने लगता है।

लीलाधर जगूड़ी

लीलाधर जगूड़ी साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हिन्दी कवि है।

जन्म 1 जुलाई 1940 को धंगड़, टिहरी-गढ़वाल जिला, उत्तराखंड में हुआ

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