
काठमांडू : (Kathmandu) नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल (Nepal’s Foreign Minister Shishir Khanal) ने कहा है कि भारत के साथ सीमा विवाद के समाधान के लिए नेपाल ने ब्रिटेन से किसी प्रकार की मध्यस्थता नहीं मांगी है। नेपाल का स्पष्ट मत है कि इस मुद्दे का समाधान दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद के माध्यम से ही होना चाहिए।
नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास (Nepali Embassy in New Delhi) में एक पत्रकार सम्मेलन में खनाल ने भारतीय पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों से नेपाल अपने भूभाग से जुड़े मुद्दों पर लगातार कूटनीतिक नोट भेजता रहा है। संबंधित समझौता भारत और चीन के बीच हुआ था। हमने दोनों देशों को कूटनीतिक नोट के माध्यम से अपनी आधिकारिक स्थिति से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि लिपुलेख और कालापानी (Lipulekh and Kalapani regions belong to Nepal) का क्षेत्र नेपाल का है। ऐतिहासिक रूप से वह भूभाग हमारा रहा है। प्रधानमंत्री ने भी यही आधिकारिक रुख व्यक्त किया है।
खनाल ने कहा कि नेपाल-भारत सीमा विवाद (Nepal-India border dispute) का संबंध लंबे ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से नेपाल और भारत के बीच की सीमा का निर्धारण वर्ष 1816 की सुगौली संधि के आधार पर हुआ था। हम इस विवाद का समाधान कूटनीतिक माध्यमों से करना चाहते हैं। इसके लिए ऐतिहासिक प्रमाणों की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम ब्रिटेन के पुस्तकालयों और संग्रहालयों से संबंधित दस्तावेज प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। हम किसी भी प्रकार की मध्यस्थता नहीं चाहते हैं।
खानाल ने कहा कि प्रधानमंत्री का भी स्पष्ट मत है कि सीमा विवाद का समाधान कूटनीतिक माध्यमों और द्विपक्षीय वार्ता के जरिए ही होना चाहिए। नेपाल की यह हमेशा से आधिकारिक नीति रही है।


