वर्ष 2002 के गुजरात दंगों में नरेन्द्र मोदी को बदनाम करने की साजिश का मामला
अहमदाबाद : वर्ष 2002 के गुजरात दंगों के दौरान गुजरात सरकार और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को बदनाम करने की साजिश मामले में तिस्ता सीतलवाड के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस शिकायत को रद्द करने को लेकर तिस्ता की ओर से 31 जुलाई को गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। इसी मामले में गुरुवार को जज समीर दवे की कोर्ट में सुनवाई की गई। मामले में जज दवे ने इस याचिका पर सुनवाई से खुद को हटाते हुए नॉट बिफोर मी का फैसला दिया।
सुनवाई के दौरान जज ने कहा कि इस केस को मेरे सामने नहीं, अन्य बेंच को सौंपने के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष मांग करने को कहा। तिस्ता की ओर से हाई कोर्ट में आवेदन किया गया था, जिसमें उल्लेख किया गया था कि उनके विरुद्ध जो भी आरोप लगाए गए हैं, वे गलत हैं। एसआईटी समेत जो भी जांच कराई जा रही है उस प्राथमिकी को रद्द किया जाए। तिस्ता सीतलवाड के विरुद्ध सह आरोपित के साथ मिलकर षडयंत्र रचने का आरोप है। इसमें तिस्ता सीतलवाड के विरुद्ध गुजरात में वर्ष 2002 के दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मेादी और अन्य नेताओं के विरुद्ध गलत सबूत और साक्षी पेश करने का आरोप है। इस षडयंत्र से निर्दोष लोगों को मौत की सजा की संभावना थी। इस केस में आरोपितों के विरुद्ध कोर्ट में चार्ज फ्रेम प्रक्रिया शुरू की गई है। इससे पूर्व तिस्ता की इस केस से डिस्चार्ज याचिका को सेशन्स कोर्ट रद्द कर चुका है। हाईकोर्ट ने भी तिस्ता की जमानत याचिका रद्द की है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की ओर से तिस्ता को राहत दी गई।


