जोधपुर : स्थाई लोक अदालत जोधपुर ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में यह व्यवस्था दी है कि वाहन में पंजीकृत क्षमता से अधिक सवारी होने पर भी बीमा दावा खारिज नहीं किया जा सकता बशर्ते दुर्घटना की वजह अधिक सवारी न हो। अदालत के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार शर्मा और सदस्य जेठमल पुरोहित तथा माणक लाल चांडक ने प्रकरण मंजूर करते हुए युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिए कि प्रार्थी को 30 दिवस में दावा राशि 3 लाख 14 हजार 281 रुपए मय 9 फीसदी ब्याज और पांच हजार रूपए वाद व्यय अदा करें।
जोधपुर निवासी गजेंद्र मेवाड़ा ने अधिवक्ता अनिल भंडारी के माध्यम से प्रकरण पेश कर कहा कि 24 फरवरी 2019 को हुई दुर्घटना में उनका दावा बीमा कंपनी ने यह कहकर खारिज कर दिया कि दुर्घटना के समय वाहन में 6 व्यक्ति थे, जबकि पंजीकृत बैठक क्षमता 5 ही है। अधिवक्ता भंडारी ने कहा कि दुर्घटना सामने आ रहे बुलडोजर चालक की गलती से हुई है और बीमा कंपनी यह प्रमाणित करने में विफल रही है कि यह हादसा कार मेंअधिक सवारी की वजह से हुआ है।
उन्होंने कहा कि अधिक सवारी होना बीमा पॉलिसी शर्तों का मूलभूत उल्लंघन नहीं होने से दावा खारिज किया जाना बीमा कंपनी की सेवा में त्रुटि और अनुचित व्यापार व्यवहार है।
बीमा कंपनी की ओर से कहा गया कि परिवहन कार्यालय द्वारा जारी आर सी और बीमा पॉलिसी में बैठक क्षमता पांच ही होने से मोटर वाहन अधिनियम और पॉलिसी शर्तों का घोर उल्लंघन होने से दावा सही खारिज किया है और सर्वेयर ने नुकसान आकलन 93 हजार 515 रुपए ही किया है।
स्थाई लोक अदालत ने प्रकरण मंजूर करते हुए कहा कि अधिक सवारी होने की वजह से दुर्घटना साबित नहीं होने से बीमा कंपनी का दावा खारिज किया जाना विधिसम्मत,युक्तियुक्त और न्यायोचित नहीं है।उन्होंने कहा कि बीमा कंपनी ने अपने जवाब में कम आकलन राशि का अभिकथन नहीं किया है और अपनी साक्ष्य में जो आकलन 93 हजार 515 रुपए का बताया है,उसे स्वीकार किया जाना न्याय के सिद्धांतो के विपरीत होगा। उन्होंने बीमा कंपनी को निर्देश दिए कि 30 दिन में दावा राशि 3 लाख 14 हजार 281 रुपए मय 9 फीसदी ब्याज और पांच हजार रुपए वाद व्यय प्रार्थी को अदा करें।


