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Jhabua : योग एक समग्र अभ्यास है, जो शरीर, मन और आत्मा को जोड़ता है: जस्टिस अबरार

झाबुआ : योग एक समग्र अभ्यास है, जो शरीर, मन और आत्मा को जोड़ता है। विभिन्न शारीरिक मुद्राओं, सांस लेने की तकनीकों और ध्यान के माध्यम से योग हमें अपने विचारों, भावनाओं और कार्यों में सामंजस्य स्थापित करने में सक्षम बनाता है। उक्त विचार विद्वान न्यायाधीश मोहम्मद सैय्यदुल अबरार ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जिला न्यायालय में आयोजित योग शिविर में उपस्थित न्यायविदों, न्यायिक कर्मचारियों एवं अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

जस्टिस अबरार ने योग के आध्यात्मिक विकास एवं शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी महत्व को प्रतिपादित करते हुए कहा कि आज हम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं। यह बहुत महत्व का अवसर है, क्योंकि हम शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कल्याण को बढ़ावा देने में योग की शक्ति को पहचानते हैं, और उसे अपनाते हैं। योग भारत में उत्पन्न एक प्राचीन प्रथा है, जो हमारे लिए इस संतुलन को प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करता है। यह एक समग्र अभ्यास है जो शरीर, मन और आत्मा को जोड़ता है। विभिन्न शारीरिक मुद्राओं सांस लेने की तकनीकों और ध्यान के माध्यम से यह हमें अपने विचारों, भावनाओं और कार्यों में सामंजस्य स्थापित करने में सक्षम बनाता है। योग को अपने जीवन में शामिल करके हम ध्यान के माध्यम से अपनी एकाग्रता और मन की स्पष्टता को बढ़ा सकते हैं।

जस्टिस सैय्यदुल अबरार ने न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े न्यायाधीशों एवं अभिभाषकों को सलाह दी कि वे न्याय चाहने वालों को योग का सहारा लेकर न्याय के साथ उनके कल्याण को भी बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि न्याय की खोज और विवादों के समाधान में हम अक्सर खुद को कानूनी व्यवस्थाओं की जटिलताओं में डूबा हुआ पाते हैं। हमारे दिमाग लगातार कार्य में लगे होते हैं, ओर इस दौरान तर्कों का विश्लेषण एवं सबूतों का वजन कर महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं। इस तरह के उलझन भरे माहौल में योग बहुत जरूरी है। कानूनी पेशेवरों के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम न केवल न्याय प्रदान करें बल्कि उन सभी के कल्याण को भी बढ़ावा दें जो न्याय चाहते हैं। हमारी भूमिका अदालत कक्ष की सीमाओं से परे फैली हुई है। हमारे पास समाज में सकारात्मक परिवर्तन को प्रेरित करने और प्रभावित करने की शक्ति है, ऐसे में योग को अपनाकर हम उदाहरण के द्वारा नेतृत्व कर सकते हैं, और दूसरों को इसकी परिवर्तनकारी क्षमता की खोज करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।

उन्होंने आव्हान किया कि इस अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आइए हम खुद को योग के अभ्यास और उसके सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध करें, ओर न केवल अपने लाभ के लिए बल्कि उन लोगों के कल्याण के लिए भी आत्मनिरीक्षण और सचेतनता को प्राथमिकता दे, जो हमारे मार्गदर्शन और विशेषज्ञता पर भरोसा करते हैं। हम एक ऐसी न्याय प्रणाली का निर्माण करने का प्रयास करें, जो न केवल कानून के शासन को बनाए रखे, बल्कि इसमें शामिल सभी व्यक्तियों के समग्र कल्याण को भी बढ़ावा दे।

योग शिविर में प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय नरेन्द्रप्रतापसिंह, विशेष न्यायाधीश विवेकसिंह रघुवंशी, प्रथम जिला न्यायाधीश राजेन्द्र कुमार शर्मा, द्वितीय जिला न्यायाधीश सुभाष सुनहरे, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गौतमसिंह मरकाम, न्यायिक मजिस्ट्रेट साक्षी मसीह, पूनमसिंह एवं बलराम मीणा, अधिवक्तागण एवं न्यायालयीन कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

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