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Dhamtari : साढ़े 42 वर्ष पूर्व धमतरी में मां गायत्री की आचार्य ने की थी प्राण प्रतिष्ठा

आचार्य के महाप्रयाण दिवस पर विशेष, मनेगी गायत्री जयंती

धमतरी : गायत्री परिवार के संस्थापक पं श्रीराम शर्मा आचार्य परिनिर्वाण दिवस पर ज्येष्ठ शुक्ल दशमी 30 मई को गायत्री जयंती मनाई जाएगी। धमतरी के लोगों ने इस युग ऋषि, वेद मूर्ति, तपोनिष्ठ का 23 दिसंबर 1981 को साक्षात दर्शन किया था। वे धमतरी के रिसाई पारा स्थित मां गायत्री के मंदिर में मां की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा करने आए थे। उनके परिनिर्वाण ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हुआ। प्रतिवर्ष इस तिथि को गायत्री जयंती मनाई जाती है। गायत्री मंदिर धमतरी में इस अवसर पर यज्ञ, मंत्र जाप सहित अन्य अनुष्ठान होंगे।

उस ऐतिहासिक समय को याद करते गायत्री परिवार के जिला समन्वयक दिलीप नाग ने बताया कि आचार्य नगरी होते हुए धमतरी पहुंचे थे। उनका मां विंध्यवासिनी मंदिर के पास एेतिहासिक स्वागत किया गया। पूजा-अर्चना के बाद नगर भ्रमण करते हुए म्युनिसिपल स्कूल अब का निगम स्कूल मैदान पहुंचे। यहां उनका दिव्य उद्बोधन हुआ। उन्हाेंने मानव कल्याण के लिए लोगों को कार्य करने की प्रेरणा दी। हजारों लोग यहां उनका उद्बोधन सुनने पहुंचे थे। उनसे प्रभावित होकर अनेक परिवार गायत्री परिवार में सम्मिलित हो गए। रात्रि विश्राम डागा धर्मशाला में किया। 24 दिसंबर 1981 को ब्रह्म मुहूर्त में रिसाई पारा स्थित नवनिर्मित गायत्री मंदिर में मां गायत्री की प्राण प्रतिष्ठा आचार्य ने की।

दिलीप नाग ने बताया कि धमतरी जिले में पांच हजार गायत्री परिवार हैं। गायत्री मंदिर में सेवा दे रहे शेखन लाल साहू ने बताया कि उस दिन धमतरी में उत्सव जैसा वातावरण था। तड़के चार बजे उन्होंने मां गायत्री की प्रतिमा की विधिविधान से पूजा-अर्चना कर प्राण प्रतिष्ठा की थी। श्रीराम शर्मा आचार्य जन्म 20 सितंबर वर्ष 1911 में ग्राम आंवल खेड़ा जिला आगरा उत्तर प्रदेश में जमींदार ब्राह्मण परिवार में हुआ था। पिता पंडित रूप किशोर शर्मा, माता दान कुंवरी की वे संतान थे। चार बार हिमालय प्रवास में गये। छह माह से एक वर्ष तक रहे। स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदारी कर तीन बार जेल गए।

अखण्ड दीप प्रज्ज्वलन वर्ष 1926 में हुआ। अखण्ड ज्योति पत्रिका का प्रकाशन विधिवत वर्ष 1940 से प्रारंभ किया। मथुरा में सहस्त्र कुण्डीय यज्ञ कर वर्ष 1958 में विशाल गायत्री परिवार का बीजारोपण किया। 1963 में युग निर्माण योजना की शुरुआत की। उनके द्वारा विचार क्रांति अभियान चलाया गया। व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण, समाज एवं राष्ट्र निर्माण का सूत्र दिया।उनका महत्वपूर्ण संदेश हम बदलेंगे, युग बदलेगा है। अपने जीवन काल में 3200 ज्ञानवर्धक साहित्य की रचना की। उनका महाप्रयाण दो जून 1990 को हुआ था। उस दिन ज्येष्ठ शुक्ल दशमी थी।

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