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Vidisha : नए संसद भवन में दिखी विजय मंदिर के साथ सांची की झलक

विदिशा : देश के नए संसद भवन का लोकार्पण रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। नए संसद भवन में विदिशा-सांची को कैनवास पर उकेरा गया है, जहां भावी देश के निर्माणकर्ता उसके इतिहास को पढ़ेंगे। इससे पहले प्राचीन विजय मंदिर की डिजाइन पर बने नए संसद भवन को लेकर विदिशा देशभर में सुर्खियों में आ गया है।

लोकार्पण के दौरान अंदर लगी देश की विभिन्न पट्टिकाओं में जहां प्राचीन नगरों का उल्लेख किया गया है। उसमें विदिशा-सांची भी शामिल हैं। यह ऐसे नगर हैं जहां से तीन धार्मिक संस्कृतियों का जन्म बताया गया है। सांची बौद्ध संस्कृति का देश में बढ़ा केंद्र रहा है। जबििक विदिशा हिंदु, जैन और बौद्ध धर्म से वास्ता प्राचीन समय से रख रहा है। रविवार को हुए लोकार्पण में विदिशा रायसेन के सांची के नाम होने के बाद लोगों को नए भारत के निर्माण में दोनों जिलों की समृद्धशाली विरासत जिसमें भारत की संरचना, प्राचीन राज्य मार्गों का उल्लेख और शहर की कितना समृद्धशाली था। उन सबका जिक्र संसद में पहुंचने वाले सांसद अध्यन के रूप में करेंगे और यहां के इतिहास को समझने में उन्हें सुगमता आएगी। इस प्रकार के कार्यों से आधुनिकता की संभावनाएं जन्म लेती है।

जहां बनेगी योजना, वहीं मिलेगा इतिहास

जिन शहरों का जिक्र संसद में लगे कैनवास पर किया गया है। उस स्थान पर बैठकर भारत की योजनाएं तैयार होंगी और प्राचीनता के हिसाब से वहां पर कार्यों को करने का खाका तैयार किया जाएगा। भारत की लोक संस्कृति और प्रदेशों की संस्कृति को भी यहां पर दर्शाया गया है। यह सब प्राचीनता की ओर बढ़ते कदम हैं, जो आधुनिक संभावनाओं और विकास के कार्यों को जन्म दे रहीं हैं।

तीन धर्मों का केंद्र रहा है जिला विदिशा

विदिशा तीन धर्मों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां पर 24 तीर्थंकर से संबंध काफी प्राचीन रहा है। इसके अलावा बौद्ध धर्म के सम्राट अशोक का विदिशा में लगाव रहा है। वैत्रवती किनारे बैसनगर में उनकी ससुराल रही है और यहीं से उनके पुत्र बौद्ध धर्म का संदेश लेकर गए थे। वहीं हिंदु धर्म में भगवान राम के अनुज शुत्रुघ्न द्वारा अश्वमेघ यज्ञ करवाना और राम के इक्ष्कावु वंश में विदिशा का उल्लेख मिलता है। इसके अलावा बेतवा का जिक्र कलयुग की गंगा के रुप में उल्लेखित किया गया है। जिसमें प्राचीन समय में बेतवा से बंदरगाहों के माध्यम से व्यापार होता था और यह नगर व्यापारिक केंद्र बिंदु था। यहां से कौशम्भी काशी, पाटलीपुत्र के राजमार्ग जुड़े हुए थे।

इतिहास हो रहा है दफन, जागी आशा

विदिशा का इतिहास दफन हो रहा है। संसद में जगह मिलने के बाद उम्मीद है कि अब विदिशा का इतिहास पुन: जीवित हो जाएगा। विजय मंदिर के अलावा ऐसे कई और प्राचीन स्मारक हैं, जो अपना अस्तित्व खो रहे हैं। प्रदेश सरकार को राम पथ गमन पर भी विचार करके विदिशा से जोड़ना चाहिए। संसद में लगी हस्त मुद्रा की आकृतियां, मैत्री भाव को प्रदर्शित करती हैं। इसके माध्यम से इस बात का जिक्र किया गया है ताकि हैप्पीनेंस बनी रहे। एक्रता रहे और हमेशा गंभीरता में रहकर कार्य किया जाए। संसद में इस प्रकार के प्रयोग प्रदेश नगर और जिले के इतिहास को जानने के लिए तैयार किए गए हैं। ताकि संस्कृति, विरासत और पुराने समय से चली आ रही परंपराओं को बखूबी निर्वहन कर नई समृद्धशाली आधुनिक भारत की संरचना को विकसित कर सकें।

जनप्रतिनिधियों को मिलेगी विदिशा के इतिहास की जानकारी

नये संसद भवन में भारत के प्राचीनतम समृद्धशाली इतिहास को उकेरा गया है। इतिहास को जानकर ही आधुनिक समद्ध भारत का निर्माण संभव है। देश की संसद जहां से भारत के नवनिर्माण की नवीनतम योजनाएं तैयार होती रहना है, वह पहुंचने वाले जनप्रतिनिधियों को इतिहास का अंकन उन्हें इतिहास के साथ योजनाओं की नई परिकल्पनाओ में मदद करेगा। साहित्यकार विनोद के शाह ने बताया कि इतिहास में विदिशा समृद्धशाली नगर के रूप में एक राजनैतिक एंव व्यापारिक केन्द्र के रुप में दुनिया की प्रतिष्ठा में शामिल रहा है। भगवान राम के इक्ष्वाकु वंश में विदिशा का उल्लेख आता है।

भगवान राम के अनुज शत्रुघ्न द्धारा अश्वमेध यज्ञ करना एंव विदिशा का आधिपत्य अपने पुत्र को सौंपना इतिहास में वर्णित है। विदिशा लम्बे समय तक मालवा क्षेत्र की राजधानी बने रहना भी इतिहास में वर्णित है। कौशाम्बी,काशी, पाटलिपुत्र के राजमार्ग से जुड़े विदिशा नगर इतिहास को गौरांवित करता है। अपार जलसंग्रह वाली बेतवा के तट पर स्थित यह व्यापारिक नगरी का व्यापार भरुचकच्छ (भरुच) एवं सोपारा जैसे व्यापारिक बंदरगाहो से जुड़ा होना हमें इसके इतिहास को जानकर आधुनिक भारत की नई समृद्धशाली संरचना विकसित करने का अवसर देता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि नई संसद में पहुंचने वाला प्रत्येक जनप्रतिनिधि इस इतिहास को पढ़ेगा, समझेगा एवं इसी के अनुरूप देश के नवनिर्माण में सहयोग करेगा।

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