
नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह उस जनहित याचिका पर मई के पहले सप्ताह में सुनवाई करेगा, जिसमें सजायाफ्ता व्यक्तियों को राजनीतिक दल बनाने और चुनाव कानूनों के तहत अयोग्य ठहराए जाने की अवधि के दौरान उनके पदाधिकारी बनने पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है।
वकील अश्विनी उपाध्याय ने न्यायमूर्ति के एम जोसेफ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ से इस पर 5 या 6 अप्रैल को सुनवाई करने का अनुरोध किया, क्योंकि आज इस पर सुनवाई की संभावना नहीं थी। इसके बाद, पीठ ने सुनवाई टाल दी।
पीठ ने कहा, ‘‘जल्दबाजी क्या है? इस पर इंतजार किया जा सकता है। मई के पहले सप्ताह में सुनवाई की जा सकती है।’’
पीठ उपाध्याय द्वारा दायर 2017 की एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कहा गया था कि सजायाफ्ता नेता, जिन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है, वे अभी भी राजनीतिक दल चला सकते हैं और उनमें पदाधिकारी बन सकते हैं, इसके अलावा यह भी तय कर सकते हैं कि कौन जनप्रतिनिधि बनेगा।
याचिका में दोषी करार लोगों पर चुनाव कानूनों के तहत अयोग्यता की अवधि के लिए राजनीतिक दल बनाने और पदाधिकारी बनने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी।
याचिका में जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 29ए को संविधान के खिलाफ घोषित करने और निर्वाचन आयोग को राजनीतिक दल का पंजीकरण करने और इसे रद्द करने के लिए अधिकृत करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया।
याचिका में निर्वाचन आयोग को चुनाव प्रणाली का गैर-अपराधीकरण करने और आंतरिक पार्टी लोकतंत्र सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई है, जैसा कि संविधान के कामकाज की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसीआरडब्ल्यूसी) द्वारा प्रस्तावित किया गया था।
याचिका में कहा गया है कि वर्तमान में हत्या, बलात्कार, तस्करी, धन शोधन, लूट, राजद्रोह या डकैती जैसे जघन्य अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया व्यक्ति भी राजनीतिक दल बना सकता है और उसका अध्यक्ष या पदाधिकारी बन सकता है।


