
मुंबई: (Mumbai) घाटकोपर पश्चिम के खोत गली में मंगलवार सुबह से दोपहर तक फेरीवालों के खिलाफ पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की खूब चर्चा हुई। कार्रवाई करने वाला कोई नगर निगम का कर्मचारी और अधिकारी नहीं है। नगर पालिका को इस कार्रवाई के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। मनसे की ओर से घाटकोपर के सहायक नगर आयुक्त और घाटकोपर पुलिस से संयुक्त कार्रवाई की मांग की गई थी,क्योंकि घाटकोपर पश्चिम की सड़कों पर फेरीवाले एक ओर तो नागरिक चल-फिर नहीं पा रहे हैं और दूसरी ओर, रिक्शा भी नहीं आ पा रहे हैं। कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने हिंसक आंदोलन की चेतावनी दी थी।
नगर पालिका को विश्वास में लिए बिना पुलिस कार्रवाई करने का आरोप
नागरिकों ने पुलिस पर नगर पालिका को विश्वास में लिए बिना जल्दबाजी में मंगलवार की कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। इस बीच घाटकोपर थाने के पुलिस अधिकारी डाके के साथ आज इस पुलिस अभियान के लिए वर्दी में और वर्तमान में भेष बदलकर करीब 15 से 20 पुलिसकर्मी मौजूद रहे। पुलिस अधिकारी कहा कि यह कार्रवाई सिर्फ पुलिस ने की है नगर पालिका के कर्मचारियों ने नहीं। नागरिकों का कहना है कि घाटकोपर पश्चिम की सभी सड़कों पर जब से फेरीवाले देर शाम और रात में अपने स्टॉल लगा रहे हैं, जिससे नागरिकों का पैदल चलना मुश्किल हो गया है। वहीं, पुलिस को यह कार्रवाई करनी ही थी,तो शाम को क्यों नहीं की, नागरिकों ने पूछा डिब्बा
पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों में नहीं है तालमेल
पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान पता चला है कि नगर निगम के अधिकारियों और पुलिस के बीच तालमेल नहीं है और नगर पालिका के एन संभाग के सहायक नगर आयुक्त संजय सोनवणे इस बात से बेखबर हैं। उन्होंने कहा कि मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है। मैं जानकारी लेता हूं। घाटकोपर थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय दहाके से बार-बार संपर्क करने पर भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इसलिए, यह आश्चर्यजनक है कि इन दोनों प्रणालियों के बीच कोई समन्वय नहीं है।


