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VASAI : फेरीवालों का दोबारा सर्वे वसई में फेरीवालों की समस्या दिन पर दिन और हुई जटिल

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आबादी के साथ फेरीवालों की संख्या भी बढ़ी

वसई : विरार शहर के वसई में फेरीवालों की समस्या दिन पर दिन और भी जटिल होती जा रही है। इसका समाधान निकालने के लिए नगर पालिका एक बार फिर शहर में फेरीवालों का सर्वे करेगी और इसके वर्क ऑर्डर भी तैयार कर लिए गए हैं। वसई- विरार शहर की आबादी के साथ फेरीवालों की संख्या भी बढ़ी है। वर्तमान में शहर में जहां भी जगह है, वहां बैठे रेहड़ी वालों की तस्वीर देखने को मिल रही है। अनाधिकृत फेरीवालों व बाजारों के अवैध रूप से लगने से शहर में जाम, अस्वच्छता, रोग, प्रदूषण आदि उत्पन्न होने लगे हैं। सड़कें व फुटपाथ भी उखड़ गए हैं, जिससे आम नागरिकों का निकलना मुश्किल हो गया है। नगर पालिका ने कुछ साल पहले फेरीवालों का सर्वे कराया था। उस समय 12 से 14 हजार फेरीवाले ही थे। जैसा कि इसे भी ठीक से लागू नहीं किया गया था, इस मुद्दे पर कोई उपाय नहीं किए गए थे। अब इस समस्या के समाधान के लिए शहर के अलग-अलग हिस्सों में बैठे फेरीवालों का एक बार फिर वार्डवार सर्वे किया जाएगा। नगर निगम के अधिकारी ने बताया कि नंबर और फॉर्म जैसे सभी पहलुओं पर गौर किया जाएगा। इस सर्वे के बाद हॉकर पॉलिसी, सीटिंग एरिया, हॉकर एरिया, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।

अभिलेख नहीं होने से हंगामा
कोरोना संकट के दौरान कई लोगों की नौकरी चली गई। उसके बाद छोटे व्यवसायियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत नाममात्र ब्याज दर पर ऋण वितरित किया जा रहा है। शहर में 24 हजार 969 पात्र हितग्राही हैं, जिनमें से 15 हजार 945 को ऋण स्वीकृत किया जा चुका है। नगर पालिका ने बताया कि 9 हजार 809 फेरीवालों को वितरित किया जा चुका है। नगर पालिका के पास फेरीवालों का कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसलिए अक्सर यह सामने आया है कि मंडी कर वसूलने के लिए नियुक्त ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं। एकत्र किए गए बाजार कर की सही मात्रा के बारे में जानकारी के अभाव में नगरपालिका को आर्थिक रूप से नुकसान उठाना पड़ता है।

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