
वाराणसी : (Varanasi) वर्ष 2002 में जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह (former Jaunpur MP Dhananjay Singh) पर हुए प्राणघातक हमले के बहुचर्चित मामले में करीब 24 वर्ष बाद विशेष एमपी/एमएलए अदालत ने सभी आरोपितों को बरी कर दिया। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में विधायक अभय सिंह और एमएलसी श्याम नारायण सिंह (MLA Abhay Singh and MLC Shyam Narayan Singh) सहित कुल 6 आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया।
विशेष न्यायालय (एमपी/एमएलए) के न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह (Judge Yajuvendra Vikram Singh) ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। इसी आधार पर सभी आरोपितों को बरी कर दिया गया।
घटना का विवरण (4 अक्टूबर 2002)
अभियोजन के अनुसार, 4 अक्टूबर 2002 की शाम करीब 6 बजे, तत्कालीन रारी विधायक धनंजय सिंह वाराणसी से जौनपुर लौट रहे थे। नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा (Taksal Cinema in the Nadesar area) के पास उनके काफिले पर अज्ञात हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में उनके गनर ने भी गोली चलाई। इस हमले में धनंजय सिंह, गनर वासुदेव पांडेय और ड्राइवर समेत कई लोग घायल हुए थे।
घटना के बाद कैंट थाने में नामजद मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने जांच पूरी कर 14 दिसंबर 2002 को आरोप पत्र दाखिल किया, जिसमें छह लोगों को आरोपी बनाया गया था।
लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद निर्णय
करीब दो दशक से अधिक समय तक चली सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण किया। अंततः अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते सभी आरोपितों को बरी कर दिया गया।
यह मामला उत्तर प्रदेश की उन लंबित आपराधिक सुनवाइयों में शामिल रहा, जिनमें फैसला आने में लंबा समय लगा। अदालत के इस निर्णय के साथ ही एक पुराना और चर्चित केस विधिक रूप से समाप्त हो गया।


