
पूरे शहर में चलाया जा रहा है हस्ताक्षर अभियान
उल्हासनगर : भारतीय संविधान का अनुच्छेद 47 सरकार पर नागरिकों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी निर्धारित करता है। चाहे वह केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार! सरकार द्वारा कई स्वास्थ्य योजनाएं लागू की जाती हैं। इस सब पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं। हालांकि, आम नागरिकों को स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता वह नहीं मिल रही है जो वे चाहते हैं। हमारे पास अस्पतालों को वर्गीकृत किया गया है। मध्यम वर्ग के लोग निजी अस्पतालों का समर्थन करते हैं,लेकिन अब थेरेपी इतनी महंगी हो गई है कि मध्यम वर्ग, उच्च मध्यम वर्ग भी निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च नहीं उठा सकता है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों की गुणवत्ता समय की मांग बन गई है। उल्हासनगर में जिला स्तरीय केंद्रीय अस्पताल है लेकिन जिला अस्पताल में वहां लागू सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। यह वर्षों से चल रहा है। इसके खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है। यह न केवल हमारे स्वास्थ्य का सवाल है, बल्कि हमारे संवैधानिक अधिकारों का भी है। सिटिजन हेल्थ केयर फाउंडेशन और उल्हासनगर के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने एक साथ आने और नागरिकों के संवैधानिक स्वास्थ्य अधिकारों के लिए लड़ने का फैसला किया है। इसके लिए भारत के संविधान दिवस 26 नवंबर को पूरे शहर में हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है। जिसकी शुरुवात 26 नवंबर की सुबह 10 बजे सेंट्रल अस्पताल उल्हासनगर 3 से हुई, इसके पश्चात शामको 5 बजे से 7 बजे तक धोबीघाट स्थित अनिल मिश्रा के जनसंपर्क कार्यलय में किया गया। इस प्रकार से विभिन्न इलाकों में सामाजिक संघटनों द्वारा हस्ताक्षर अभियान किया जाएगा, हस्ताक्षर अभियान की शुरुवात में उल्हासनगर व आसपास के एनजीओ, सामाजिक संगठन भी इस हस्ताक्षर अभियान में हिस्सा लिया, सिव्हिल सर्जन डॉ बनसोडे डॉ दोडे,सिटीजन हेल्थ केअर फाऊंडेशन के समन्वयक समाजसेवी शिवाजी रगडे, सतीश मराठे, राज असरोंडकर, नितेश राजपूत, शशिकांत दायमा, जगदीश उदासी, जमील खान, अमोल देशमुख, पवन पचगाडे, सचिन चौधरी, सुनील खंदेकरी, समाधान वाघ प्रमोद घनबहादुर नीतू विश्वकर्मा गणेश वन्हाडे, राजेंद्र देठे, प्रशांत कोली, विजय बिलडान, प्रभाकर अहिरे, विजय पवार, रोहित परदेशी, समाजसेवी राजू तेलकर द्वारा हस्ताक्षर अभियान को सफल बनाया गया।


