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Ranchi : गैंगस्टर प्रिंस खान के वायरल वीडियो पर बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर हमला

Ranchi: Babulal Marandi Attacks Hemant Government Over Gangster Prince Khan's Viral Video

रांची : (Ranchi) झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी (Babulal Marandi, the Leader of the Opposition in the Jharkhand Legislative Assembly) ने गैंगस्टर प्रिंस खान (gangster Prince Khan) के एक वायरल वीडियो को लेकर राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर हमला बोला है। मरांडी ने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाते हुए पुलिस और अपराधियों की कार्यशैली पर निशाना साधा।

शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए मरांडी ने कहा कि सामान्यतः पुलिस अपराधियों का पर्दाफाश करती है, लेकिन झारखंड में स्थिति उलट दिखाई दे रही है। गैंगस्टर प्रिंस खान का वायरल वीडियो न केवल पुलिस को खुली चुनौती दे रहा है, बल्कि धनबाद के एसएसपी (Dhanbad Senior Superintendent of Police) के कार्यकाल का भी “मूल्यांकन” कर रहा है।

मरांडी ने आरोप लगाया कि धनबाद में पुलिस और अपराधियों के बीच संघर्ष नहीं, बल्कि दो समानांतर गिरोहों के बीच गैंगवार जैसी स्थिति बन गई है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों में यह प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है कि व्यापारियों और आम लोगों के बीच कौन अधिक दहशत फैला सकता है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि फर्क सिर्फ इतना है कि “एक वर्दी पहनकर कथित वसूली कर रहा है, जबकि दूसरा बिना वर्दी के।”

उन्होंने आगे कहा कि राज्य में सत्ता संरक्षण की आशंका और भी गंभीर चिंता का विषय है।

मरांडी ने दावा किया कि जब यह चर्चा आम हो जाए कि संवेदनशील जिलों में करोड़ों रुपये की बोली लगाकर पोस्टिंग ली जाती है, तो जनता का प्रशासन और कानून व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है।

नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि क्या ऐसी पोस्टिंग कानून व्यवस्था सुधारने के लिए की जा रही है या फिर यह किसी “एक्सटॉर्शन लाइसेंस” की तरह काम कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Chief Minister Hemant Soren) से इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की।

मरांडी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वसूली और भय के माहौल वाली यह कार्यशैली जारी रही, तो झारखंड की स्थिति “जंगलराज” से भी बदतर हो सकती है। उन्होंने कहा कि जब रक्षक ही भय का कारण बनने लगें, तब लोकतंत्र और जनता दोनों असुरक्षित महसूस करने लगते हैं।

उन्होंने अंत में कहा कि अब राज्य की जनता पूछ रही है कि आखिर “एक्सटॉर्शन लाइसेंस” देने का यह कथित खेल कब तक चलता रहेगा।

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