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प्रेरक प्रसंग: योग्यता

चंद्रशेखर वेंकटरमन ने 1949 में रमन शोध संस्थान की स्थापना की थी। वैज्ञानिक सहायक के पद के लिए बहुत-से आवेदकों का साक्षात्कार किया गया। साक्षात्कार पूरा हो जाने के बाद सर सी वी रमन ने पाया कि एक आवेदक (जो उपयुक्त नहीं पाया गया था) अब भी साक्षात्कार कक्ष के बाहर चहलकदमी कर रहा था। रमन उसके पास गए और झल्लाकर पूछा, ‘आप यहां क्या कर रहे हैं? मैंने आपसे कह दिया है ना कि मैं आपका चयन कर सकता हूं। उसके बाद भी आप यहां क्यों मंडरा रहे हैं।’ ‘महोदय, मैं यह बात अच्छी तरह से जानता हूं, परंतु मैं मुझे दी गई कुछ अतिरिक्त राशि वापस करने आया हूं, जो संभवतः कार्यालयीन ग़लती के कारण यात्रा भत्ते के नाम पर मुझे दे दी गई है।’ ‘ओह, ऐसा है क्या’, रमन ने आश्चर्यचकित होते हुए कहा और अपना हाथ उसके कंधे पर रखकर उसे अपने कार्यालय में लाते हुए कहा, ‘आओ अंदर अभी-अभी आप विज्ञप्ति पद के लिए चुन लिए गए। इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता है कि भौतिकी का तुम्हारा ज्ञान पर्याप्त नहीं है। वह तो मैं तुम्हें पढ़ा सकता हूं, परंतु आप जैसे चरित्रवान व्यक्ति हों और यही मेरे लिए महत्वपूर्ण है।’

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