spot_img

रोजाना एक कविता : आज पढ़िए निर्मला पुतुल को जिनकी कविताओं में नगाड़े की तरह बजते हैं शब्द

क्या तुम जानते हो
पुरुष से भिन्न
एक स्त्री का एकांत
घर-प्रेम और जाति से अलग
एक स्त्री को उसकी अपनी ज़मीन
के बारे में बता सकते हो तुम।
बता सकते हो
सदियों से अपना घर तलाशती
एक बेचैन स्त्री को
उसके घर का पता।
क्या तुम जानते हो
अपनी कल्पना में
किस तरह एक ही समय में
स्वंय को स्थापित और निर्वासित
करती है एक स्त्री
सपनों में भागती
एक स्त्री का पीछा करते
कभी देखा है तुमने उसे
रिश्तों के कुरुक्षेत्र में
अपने आपसे लड़ते।
तन के भूगोल से परे
एक स्त्री के
मन की गाँठे खोलकर
कभी पढ़ा है तुमने
उसके भीतर का खौलता इतिहास
पढ़ा है कभी
उसकी चुप्पी की दहलीज़ पर बैठ
शब्दो की प्रतीक्षा में उसके चेहरे को
उसके अंदर वंशबीज बोते
क्या तुमने कभी महसूसा है
उसकी फैलती जड़ो को अपने भीतर।
क्या तुम जानते हो
एक स्त्री के समस्त रिश्ते का व्याकरण
बता सकते हो तुम
एक स्त्री को स्त्री-दृष्टि से देखते
उसके स्त्रीत्व की परिभाषा
अगर नहीं
तो फिर जानते क्या हो तुम
रसोई और बिस्तर के गणित से परे
एक स्त्री के बारे में!
~ निर्मला पुतुल

Mumbai : महाराष्ट्र के पुणे जहरीली देशी शराब मामले में 9 पुलिसकर्मियों सहित 22 सरकारी कर्मचारी निलंबित

मुंबई : (Mumbai) महाराष्ट्र के पुणे जहरीली देशी शराब मामले (liquor case in Pune, Maharashtra) में अब तक 9 पुलिस अधिकारी-कर्मचारी और 13 राज्य...

Explore our articles