
नई दिल्ली : (New Delhi) उच्चतम न्यायालय ने असम के मुख्यमंत्री डाॅ. हिमंत बिस्वा सरमा (Assam Chief Minister Dr. Himanta Biswa Sarma) के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant) की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे पहले उच्च न्यायालय जाएं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी (senior lawyer Abhishek Manu Singhvi) ने दलील दी कि मुख्यमंत्री ने संविधान की शपथ का उल्लंघन किया है। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि आप यही बात उच्च न्यायालय में कह सकते हैं। आप उच्च न्यायालय जा सकते हैं। हमारे पास पहले से लंबित मामले हैं, जिन्हें निपटाना है। यह पूरा प्रयास उच्च न्यायालय का मनोबल गिराने का है। उच्च न्यायालय को कमजोर करने की एक सुनियोजित कोशिश हो रही है।
राजनीतिक दल सीपीआईएम ने दायर याचिका में कहा है कि असम के मुख्यमंत्री ने मुस्लिम समुदाय को लेकर कई विवादित बयान दिए हैं। एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें मुख्यमंत्री को मुस्लिम टोपी पहने कुछ लोगों पर बंदूक से निशाना साधते हुए दिखाया गया है। इस मामले को लेकर शिकायत दर्ज की गई है, लेकिन कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
एक याचिका जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से मौलाना महमूद मदनी (Maulana Mahmood Madani) ने भी दायर की है। याचिका में जमीयत का कहना है कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के बयानों को राजनीति बयानबाजी या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहकर खारिज नहीं किया जाना चाहिए। याचिका में 27 जनवरी के डाॅ. हिमंता बिस्वा सरमा (Dr. Himanta Biswa Sarma) के उस बयान का जिक्र किया गया है, जिसमें मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। याचिकाकर्ता के वकील एमआर शमशाद ने उच्चतम न्यायालय से मांग की है कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि सार्वजनिक पदों का दुरुपयोग किसी समुदाय के खिलाफ घृणा फैलाने के लिए नहीं किया जाए।


