
अभी तक सबसे निचले स्तर पर पहुंची भारतीय मुद्रा
नई दिल्ली : (New Delhi) पश्चिम एशिया में जारी जंग भारतीय मुद्रा (Indian currency) रुपये के लिए भी बड़ी परेशानी की वजह बनी हुई है। भारतीय मुद्रा आज डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गई। आज के कारोबार में भारतीय मुद्रा अमेरिकी डॉलर की तुलना में 64 पैसे की कमजोरी के साथ 93.28 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक आ गई। इसके बाद रुपये की स्थिति में मामूली सुधार भी हुआ। सुबह 11 बजे डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा 93.20 रुपये के स्तर पर थी।
रुपये ने आज के कारोबार की शुरुआत भी गिरावट के साथ ही की थी। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट (interbank foreign exchange market) में भारतीय मुद्रा ने आज सुबह डॉलर के मुकाबले 25 पैसे की कमजोरी के साथ 92.64 रुपये के स्तर से कारोबार की शुरुआत की थी। आज का कारोबार शुरू होने के बाद रुपये की स्थिति लगातार गिरती चली गई। डॉलर की मांग में आई तेजी के कारण थोड़ी ही देर में भारतीय मुद्रा फिसल कर अभी तक के सबसे निचले स्तर 93.28 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक आ गई। हालांकि इस गिरावट के बाद रुपये की स्थिति में मामूली सुधार भी होता नजर आया, लेकिन भारतीय मुद्रा लगातार 93 रुपये के स्तर के पार ही बनी रही।
मुद्रा बाजार के आज के कारोबार में रुपया डॉलर के साथ ही ब्रिटिश पौंड (British Pound) (GBP) और यूरो के मुकाबले भी कमजोर प्रदर्शन करता हुआ नजर आ रहा है। सुबह 11 बजे तक के कारोबार के बाद ब्रिटिश पौंड (GBP) की तुलना में रुपया 1.93 रुपये की कमजोरी के साथ 125.01 के स्तर पर पहुंचा हुआ था। इसी तरह यूरो की तुलना में रुपया सुबह 11 बजे 87.38 पैसे की गिरावट के साथ 107.77 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि रुपये की कमजोरी के लिए पश्चिम एशिया में जारी जंग के साथ ही डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बड़ी वजह है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमला शुरू करने के बाद से ही विदेशी निवेशक भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट (emerging market) वाले देश से अपना पैसा सुरक्षित निकालने में जुटे हुए हैं। ऐसा होने से डॉलर की मांग लगातार बढ़ती जा रही है, वहीं रुपये पर दबाव भी काफी अधिक हो गया है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमत में आई जोरदार तेजी ने भी डॉलर की मांग बढ़ा दी है, जिससे रुपये पर नकारात्मक असर पड़ा है।
खुराना सिक्योरिटीज एंड फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ रवि चंदर खुराना (Ravi Chander Khurana) का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में जारी जंग लंबी खिंच गई, तो कच्चे तेल और गैस की कीमत आसमान छू सकती हैं। खासकर, कच्चे तेल की कीमत डेढ़ सौ डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर सकती है। ऐसा होने पर कच्चे तेल और गैस की अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए विदेशी बाजार पर निर्भर करने वाले भारत की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही भारतीय मुद्रा भी ऐतिहासिक गिरावट का शिकार हो सकती है।


