
नई दिल्ली : (New Delhi) सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस बात पर जोर दिया कि किसी आरोपी को दी जाने वाली कानूनी सहायता सिर्फ एक रस्म या नाममात्र की औपचारिकता नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह एक ठोस और सार्थक प्रक्रिया होनी चाहिए जो वकील की प्रभावी सहायता सुनिश्चित करे। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एस.सी. शर्मा (justice Dipankar Datta and Justice S.C. Sharma) की पीठ ने 70 साल के नंदकिशोर मिश्रा (Nandkishore Mishra) की याचिका पर फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की। नंदकिशोर मिश्रा को ट्रायल कोर्ट ने हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। पीठ ने पाया कि आरोपी मध्य प्रदेश के एक सुधार गृह में बंद था। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने कोर्ट की सहायता करने और आरोपी का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक ‘एमिकस क्यूरी’ (Amicus Curiae’) (कोर्ट का सहायक वकील) नियुक्त किया। इसके बाद हाईकोर्ट ने मात्र छह दिनों में मामले का निपटारा कर दिया।


