
नई दिल्ली : (New Delhi) वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के विदेशी व्यापार (India’s foreign trade) के आंकड़ों में फरवरी माह के दौरान असंतुलन देखने को मिला है। देश का वस्तु निर्यात फरवरी में हल्की गिरावट के साथ 36.61 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया, जबकि आयात में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। आयात के तेजी से बढ़ने के कारण व्यापार घाटा बढ़कर 27.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
निर्यात में 0.81 फीसद की गिरावट
सरकार के अनुसार फरवरी महीने में भारत के निर्यात (India’s exports) में करीब 0.81 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और यह 24.11 प्रतिशत बढ़कर 63.71 अरब डॉलर पर पहुंच गया। पिछले वर्ष फरवरी 2025 में आयात का आंकड़ा 51.33 अरब डॉलर था। निर्यात की तुलना में आयात में अधिक वृद्धि होने से दोनों के बीच का अंतर बढ़ गया और इसी वजह से व्यापार घाटा भी काफी ऊंचे स्तर पर दर्ज किया गया।
पश्चिम एशिया तनाव से व्यापार प्रभावित
ये आंकड़े (Ministry of Commerce and Industry) की ओर से जारी किए गए हैं। मंत्रालय का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पन्न परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण वैश्विक व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ा है, जिसका प्रभाव भारतीय निर्यात पर भी दिखाई दे रहा है।
फरवरी तक 402.93 अरब डालर का निर्यात
इस संबंध में राजेश अग्रवाल (Rajesh Agarwal) ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत का निर्यात अपेक्षाकृत संतोषजनक प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल से फरवरी तक की अवधि में भारत का कुल निर्यात 1.84 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 402.93 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है।
आयात में 8.53 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी
इसी अवधि के दौरान आयात में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। अप्रैल से फरवरी के बीच कुल आयात 8.53 प्रतिशत बढ़कर 713.53 अरब डॉलर हो गया। इस प्रकार वर्ष के अधिकांश महीनों में आयात और निर्यात के बीच अंतर बना रहा है, जिससे व्यापार घाटे का दबाव भी कायम है। वाणिज्य सचिव ने यह भी संकेत दिया कि पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों का असर आने वाले महीनों में और स्पष्ट हो सकता है।
मार्च के निर्यात पर दिख रहा दबाव
वाणिज्य सचिव (Commerce Secretary)के अनुसार फरवरी के अंत में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने और कुछ महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों पर बाधा उत्पन्न होने से लॉजिस्टिक चुनौतियां सामने आई हैं। विशेष रूप से (Strait of Hormuz) जैसे प्रमुख समुद्री मार्गों पर उत्पन्न अनिश्चितता ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। इसके चलते मार्च महीने में निर्यात के आंकड़ों पर भी दबाव देखने को मिल सकता है।
भारत-अमेरिका के बीच बातचीत जारी
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर भी बातचीत जारी है। सरकार के अनुसार दोनों देशों के बीच शुल्क संरचना और अन्य व्यापारिक प्रावधानों पर चर्चा चल रही है। अधिकारियों का कहना है कि नए शुल्क ढांचे को अंतिम रूप देने के बाद ही इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां स्थिर होती हैं और प्रमुख व्यापार मार्गों पर बाधाएं कम होती हैं, तो आने वाले महीनों में भारत के निर्यात में सुधार देखने को मिल सकता है।


