
नई दिल्ली : (New Delhi) देश के बंदरगाहों ने वित्त वर्ष 2025-26 में 915.17 मिलियन टन कार्गो (915.17 million tonnes of cargo during the financial year 2025-26) का आदान-प्रदान कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह पिछले वर्ष के 854.86 मिलियन टन के मुकाबले 7.06 प्रतिशत अधिक है। खास बात यह है कि केंद्र सरकार (Central Government) द्वारा निर्धारित 904 मिलियन टन के लक्ष्य को भी पार कर लिया गया है।
यह उपलब्धि बंदरगाहों की बढ़ती क्षमता, परिचालन दक्षता, बेहतर लॉजिस्टिक्स और आधुनिक बुनियादी ढांचे का परिणाम मानी जा रही है। इससे भारत के समुद्री क्षेत्र की मजबूती और वैश्विक व्यापार में उसकी बढ़ती भूमिका स्पष्ट होती है।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय (Union Ministry of Ports, Shipping and Waterways) के अनुसार, यह वृद्धि सरकार की पोर्ट-आधारित विकास नीति, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और डिजिटल पहलों के कारण संभव हुई है। मंत्रालय ने बताया कि कार्गो हैंडलिंग क्षमता में सुधार और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से बंदरगाहों का प्रदर्शन बेहतर हुआ है।
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल (Union Minister Sarbananda Sonowal) ने इस उपलब्धि को सरकार के निरंतर प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं।
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, दीनदयाल उपाध्याय बंदरगाह (Deendayal Upadhyay Port) 160.11 मिलियन टन कार्गो के साथ शीर्ष स्थान पर रहा। इसके बाद पारादीप बंदरगाह (156.45 मिलियन टन) और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण (102.01 मिलियन टन) का स्थान रहा।
अन्य प्रमुख बंदरगाहों में विशाखापट्टनम बंदरगाह (91.16 मिलियन टन), मुंबई बंदरगाह (75.14 मिलियन टन), चेन्नई बंदरगाह (57.90 मिलियन टन) और न्यू मंगलौर बंदरगाह (50.04 मिलियन टन) शामिल हैं।
कोलकाता बंदरगाह का कुल कार्गो 70.87 मिलियन टन रहा, जिसमें कोलकाता डॉक सिस्टम (19.01 मिलियन टन) और हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स (51.85 मिलियन टन) शामिल हैं। इसके अलावा कामराजार बंदरगाह (49.08 मिलियन टन), वीओ चिदंबरनार बंदरगाह (43.31 मिलियन टन) और कोचीन बंदरगाह (38.06 मिलियन टन) का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
वृद्धि दर के लिहाज से मोरमुगाओ बंदरगाह ने 15.91 प्रतिशत की सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की। इसके अलावा कोलकाता डॉक सिस्टम (14.28 प्रतिशत), जेएनपीए (10.74 प्रतिशत), विशाखापट्टनम (10.34 प्रतिशत) और मुंबई बंदरगाह (9.50 प्रतिशत) में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
मंत्रालय के अनुसार, यह वृद्धि कोयला, कच्चा तेल, कंटेनर, उर्वरक और पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती मांग, बेहतर कनेक्टिविटी और डिजिटल सुधारों के कारण संभव हो पाई है।-


