
नयी दिल्ली : केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पर्ल्स ग्रुप के निदेशक हरचंद सिंह गिल को गिरफ्तार कर लिया है। गिल को पर्ल्स ग्रुप द्वारा कथित रूप से किए गए 60,000 करोड़ रुपये के पोंजी घोटाले की जांच के तहत फिजी से भारत निर्वासित किया गया था।
अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ के तहत गिल को निर्वासित किये जाने के बाद उन्हें लाने के लिए सीबीआई अधिकारियों का एक दल सुवा (फिजी) गया था और यहां पहुंचने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
सीबीआई ने विदेश में रहने वाले भगोड़े लोगों को वापस लाने के लिए पिछले साल ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ शुरू किया था। अबतक लगभग 30 भगोड़ों को सफलतापूर्वक भारत लाया गया।
इस अभियान का उद्देश्य इंटरपोल की मदद से अपराध की कमाई और भगोड़ों का पता लगाना एवं उन्हें वापस लाना है।
अधिकारियों ने बताया कि गिल इस मामले में फरार था और उसके खिलाफ विशेष अदालत से गिरफ्तारी का एक ऐसा गैर जमानती वारंट जारी किया गया था जिसकी तामील की तारीख तय नहीं की गयी थी।
उन्होंने बताया कि सीबीआई ने इंटरपोल के माध्यम से उसके खिलाफ ‘रेड नोटिस’ प्रकाशित करवाया।
एजेंसी ने 19 फरवरी, 2014 में 5.5 करोड़ निवेशकों को निवेश के बदले जमीन देने की पेशकश करके ठगने के आरोप में पर्ल्स ग्रुप और उसके संस्थापक निर्मल सिंह भंगू के खिलाफ जांच शुरू की थी।
एजेंसी ने आरोप लगाया है कि देशभर में निवेशकों को धोखा देकर कंपनी ने 60,000 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि की ठगी की।
सीबीआई का आरोप है कि गिल पर्ल्स ग्रुप की कंपनी पीजीएफ में निदेशक और शेयरधारक थे। आरोप है कि वह बोर्ड की उन सभी बैठकों में उपस्थित रहे जहां सभी महत्वपूर्ण फैसले लिये गये।


