
नासिक : (Nashik) टीसीएस के नासिक कार्यालय से जुड़े यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण मामले (case involving allegations of sexual harassment and forced conversion) ने अब नया मोड़ ले लिया है। नासिक पुलिस द्वारा दाखिल पहले आरोपपत्र में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen) (AIMIM) के पूर्व सांसद इम्तियाज जलील (MP Imtiaz Jaleel) का नाम सीधे तौर पर शामिल होने से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है।
नासिक के देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन (Deolali Camp Police Station in Nashik) में दर्ज इस पहले मामले में बलात्कार, अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण कानून और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। लगभग 3,500 पन्नों का यह पहला आरोपपत्र अदालत में प्रस्तुत किया गया है। मुख्य आरोपित निदा खान (Nida Khan) को अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद वह फरार हो गई थी। तकनीकी जांच और गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। जांच के दौरान एआईएमआईएम के पूर्व नगरसेवक मतीन पटेल द्वारा उसे छिपाने में मदद करने की बात सामने आई। पूछताछ के दौरान मतीन पटेल ने कथित रूप से कहा की इसके लिए इम्तियाज जलील साहब से पूछना होगा। इसके बाद पुलिस ने नारेगांव-कौसर सिडको इलाके में छापा मारकर निदा खान और उसके परिवार को हिरासत में लिया। जिस घर में निदा खान छिपी हुई थी, उस सहित दो अन्य संपत्तियों पर अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई की गई। इस मामले में घर के मालिक हनीफ खान (Hanif Khan) को भी सह-आरोपित बनाया गया है।
फिलहाल, हज यात्रा के लिए सऊदी अरब में मौजूद इम्तियाज जलील ने फोन पर प्रतिक्रिया देता हुए कहा कि मुझे नहीं पता कि मेरा नाम आरोपपत्र में शामिल किया गया है। मैं किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हूं। जलील ने यह भी स्वीकार किया कि वह पीड़ित परिवार से मिले थे।


