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Mumbai : विदेश में नौकरी के नाम पर युवाओं को बना रहे ‘साइबर गुलाम’

Mumbai: Youths Being Turned into ‘Cyber ​​Slaves’ Under the Pretext of Jobs Abroad

बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत ठुकराई
मुंबई : (Mumbai)
बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने विदेश में नौकरी का लालच देकर युवाओं को साइबर अपराध में धकेलने वाले मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति ए. एस. गडकरी और एस. सी. चंदक (Justice A. S. Gadkari and Justice S. C. Chandak) की खंडपीठ ने कहा कि यह अपराध बेहद गंभीर है और समाज के भविष्य के लिए घातक साबित हो सकता है।

क्या है पूरा मामला
मामले में आरोपी जेरी फिलिप्स जैकब (Jerry Phillips Jacob) पर आरोप है कि उसने कई शिक्षित युवाओं को विदेशी कंपनियों में आकर्षक और वैध नौकरी का झांसा दिया। जब ये युवक विदेश पहुंचे तो उन्हें बंधक बनाकर अन्य देशों के लोगों के साथ साइबर धोखाधड़ी (cyber fraud) करने के लिए मजबूर किया गया। अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मानव तस्करी का मामला बनता है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पीड़ितों को नौकरी की वास्तविक प्रकृति के बारे में पूरी तरह अंधेरे में रखा गया था। न्यायालय के अनुसार यह अत्यंत गंभीर अपराध है, जिसमें पीड़ितों को अवैध तरीके से दूसरों को ठगने के लिए मजबूर किया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि आरोपी को जमानत दी जाती है तो उसके फरार होने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की आशंका है।

आरोपी की दलीलें खारिज
मार्च 2024 से जेल में बंद आरोपी ने अदालत में दावा किया कि पीड़ितों को नौकरी के कॉन्ट्रैक्ट दिए गए थे और वे अपनी इच्छा से विदेश गए थे। उसने खुद पर लगे गुलामी और मानव तस्करी के आरोपों को गलत बताया। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि युवाओं को वैध रोजगार का झूठा आश्वासन देकर विदेश भेजना स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी और मानव तस्करी (fraud and human trafficking) की श्रेणी में आता है।

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