
एकनाथ शिंदे ने पुलिस एक्शन को बताया लोकतंत्र की हत्या
मुंबई : (Mumbai) सतारा जिला परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव (election for the post of President of the Satara Zilla Parishad) ने महाराष्ट्र की महायुति (BJP, शिवसेना-शिंदे, और NCP-अजीत पवार) (Maharashtra’s ‘Mahayuti’) सरकार के भीतर एक बड़ा राजनैतिक संकट खड़ा कर दिया है। पिछले शुक्रवार को हुए इस चुनाव में भाजपा की प्रिया शिंदे ने जीत हासिल की, लेकिन इस जीत के पीछे के नाटकीय घटनाक्रम ने सहयोगियों के बीच कड़वाहट पैदा कर दी है।
बहुमत का गणित और उलटफेर
सतारा जिला परिषद (Satara Zilla Parishad) की कुल 65 सीटों में से भाजपा के पास 28 सीटें थीं, जबकि बहुमत के लिए 33 की जरूरत थी। शिवसेना (15) और NCP (20) का गठबंधन 35 सीटों के साथ मजबूत स्थिति में था। लेकिन चुनाव के दिन भाजपा की प्रिया शिंदे (BJP’s Priya Shinde) को 32 वोट मिले और वे अध्यक्ष चुन ली गईं। विपक्ष (शिवसेना-NCP) का आरोप है कि भाजपा ने पुलिस की मदद से उनके सदस्यों को वोट डालने से रोका और क्रॉस-वोटिंग कराई।
पुलिस कार्रवाई पर भड़के एकनाथ शिंदे
उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे (Deputy Chief Minister and Shiv Sena Chief Eknath Shinde) ने विधानसभा में इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस ने एक निर्वाचित सदस्य को 5-10 साल पुराने केस में वोटिंग से ठीक पहले उठा लिया। शिंदे ने इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार देते हुए कहा कि उन्होंने खुद एसपी को फोन किया था, फिर भी पुलिस ने “अपराधियों” जैसा व्यवहार किया।
मंत्रियों के साथ ‘बदसलूकी’ का आरोप
सतारा के पालक मंत्री शंभूराज देसाई (शिवसेना) और मकरंद पाटिल (NCP) (Satara’s Guardian Minister Shambhuraj Desai (Shiv Sena) and Makarand Patil (NCP)) ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान पुलिस ने उनके साथ धक्का-मुक्की की। शंभूराज देसाई के हाथ में चोट भी आई और वे पट्टी बांधे नजर आए। उन्होंने इसे सत्ता का दुरुपयोग बताते हुए कैबिनेट में मुद्दा उठाने की बात कही है।
एसपी तुषार दोशी के निलंबन का निर्देश
इस हंगामे के बाद विधान परिषद की उपाध्यक्ष नीलम गोरहे ने गंभीर रुख अपनाते हुए सतारा के एसपी तुषार दोशी (Satara SP Tushar Doshi) को तुरंत निलंबित करने का निर्देश दिया है। सरकार से इस मामले में जवाब माँगा गया है कि आखिर मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों हुआ।
फडणवीस का जांच का भरोसा
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने सदन में तनाव को देखते हुए मामले को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पुलिस कार्रवाई और चुनाव के दौरान हुई घटनाओं की उच्च स्तरीय जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों और घटनाक्रम पर उचित कार्रवाई की जाएगी।


