
मुंबई : (Mumbai) पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष (ongoing conflict in West Asia) और अमेरिका द्वारा शुरू की गई नई व्यापार जांच के चलते वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) (Reserve Bank of India) के सोमवार को जारी बुलेटिन के अनुसार, फरवरी महीने में आर्थिक गतिविधियों में तेजी के संकेत मिले हैं। बुलेटिन में कहा गया है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी झटकों से निपटने के लिए पर्याप्त है और वित्त वर्ष 2025-26 (GDP for the financial year 2025-26)के लिए जीडीपी के दूसरे अग्रिम अनुमान अर्थव्यवस्था की मजबूती दर्शाते हैं।
महंगाई में बढ़ोतरी, वित्तीय संसाधनों में इजाफा
बुलेटिन के मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) (Consumer Price Index) आधारित महंगाई फरवरी में खाद्य और पेय पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण बढ़ी है। वहीं, बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिति संतोषजनक बनी रही और वाणिज्यिक क्षेत्र को मिलने वाले कुल वित्तीय संसाधनों में भी वृद्धि दर्ज की गई। इसमें बैंक और गैर-बैंक (banking and non-banking source) दोनों स्रोतों से वित्तपोषण बढ़ा है। हालांकि, आरबीआई ने स्पष्ट किया कि बुलेटिन में व्यक्त विचार लेखकों के निजी हैं और यह केंद्रीय बैंक का आधिकारिक दृष्टिकोण नहीं है।
मूडीज की चेतावनी, तेल कीमतों से बढ़ सकता है दबाव
रेटिंग एजेंसी मूडीज ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। एजेंसी के अनुसार, यदि हालात बिगड़ते हैं तो भारत की आर्थिक गतिविधियों में चार प्रतिशत तक गिरावट संभव है। साथ ही, तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर दबाव डाल सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देश खाड़ी क्षेत्र से तेल और गैस पर निर्भरता के कारण इस संकट के प्रति अधिक संवेदनशील हैं, जिससे व्यापार घाटा और महंगाई बढ़ने का खतरा बना रहता है।


