
मुंबई/नासिक : (Mumbai/Nashik) महाराष्ट्र के नासिक स्थित टीसीएस कंपनी में कथित धर्मांतरण और तथाकथित “कॉर्पोरेट जिहाद” (“Corporate Jihad”) मामले में नया मोड़ आ गया है। मामले के आरोपितों को कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए मालेगांव की इस्लाम पार्टी आगे आई है। पार्टी ने आरोपितों के बचाव के लिए वकील उपलब्ध कराने की घोषणा की है।
कोर्ट में हुई जमानत याचिकाओं पर सुनवाई
नासिक रोड स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में न्यायाधीश केदार जोशी (Judge Kedar Joshi) के समक्ष शुक्रवार को आरोपित निदा खान (Nida Khan) सहित अन्य दो संदिग्धों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सरकारी पक्ष की दलीलों के लिए अगली तारीख तय करते हुए 19 जून को जमानत याचिका पर निर्णय सुरक्षित रखा है।
दानिश शेख और निदा खान की ओर से पेश हुईं दलीलें
आरोपित दानिश एजाज शेख की ओर से अधिवक्ता फैज वसीफ ने अदालत (Advocate Faiz Wasif presented the case on behalf of the accused, Danish Aijaz Shaikh) में पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि अदालत के समक्ष कई महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दे उठाए गए। दानिश शेख को गिरफ्तारी के बाद पहले पुलिस हिरासत और बाद में न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। वहीं, आरोपित निदा खान की ओर से अधिवक्ता राहुल कासलीवाल ने अपनी दलीलें पेश कीं।
आरोपितों के समर्थन में उतरी इस्लाम पार्टी
मामले में पहले एआईएमआईएम की भूमिका (role of AIMIM) को लेकर चर्चा थी, लेकिन अब मालेगांव स्थित इस्लाम पार्टी भी खुलकर आरोपितों के समर्थन में सामने आई है। सुनवाई के बाद मीडिया से बातचीत में पार्टी के नेता एवं पूर्व विधायक आसिफ शेख ने कहा कि मामले को जानबूझकर धार्मिक रंग देने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि संबंधित लोगों के बीच केवल मित्रता का संबंध था।
जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी लड़ाई
आसिफ शेख ने बताया कि दानिश शेख के परिवार ने कानूनी मदद के लिए उनसे संपर्क किया था, जिसके बाद पार्टी ने सहायता उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर मामला उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाया जाएगा और इस्लाम पार्टी आरोपितों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।
19 जून की सुनवाई पर टिकी निगाहें
उल्लेखनीय है कि इस मामले में जमानत याचिकाओं पर सुनवाई इससे पहले दो बार स्थगित हो चुकी है। अब 19 जून को होने वाली सुनवाई (hearing scheduled for June 19) और अदालत के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।





