
बीमा सुविधा और ‘अधिकृत सेवक’ के दर्जे पर विचार
मुंबई : (Mumbai) वन मंत्री गणेश नाईक (Forest Minister Ganesh Naik) ने राज्य के हजारों ‘सर्पमित्रों’ (‘Sarpmitras’) के लिए एक बड़ी और राहत भरी घोषणा की है। अपनी जान जोखिम में डालकर सांपों और अन्य वन्यजीवों को बचाने वाले इन निस्वार्थ सेवादारों को अब सरकार बीमा सुरक्षा कवच देने की तैयारी कर रही है। वन मंत्री गणेश नाईक ने स्वीकार किया कि सर्पमित्र बिना किसी स्वार्थ और मानधन (Salary) के बस्तियों में घुस आए सांपों को पकड़ते हैं और उन्हें सुरक्षित जंगल में छोड़ते हैं। इस दौरान कई बार सर्पदंश से उनकी जान पर बन आती है। अब तक इन्हें केवल पंजीकरण और आईडी कार्ड मिलता था, लेकिन कोई आर्थिक या सामाजिक सुरक्षा नहीं थी।
जल्द तैयार होगा डेटाबेस
सरकार ने निर्णय लिया है कि राज्य के सभी अधिकृत सर्पमित्रों का डेटा इकट्ठा किया जाएगा। एक बार डेटा तैयार होने के बाद, सरकार उन्हें एक व्यापक बीमा पॉलिसी के दायरे में लाएगी। इससे यदि रेस्क्यू के दौरान कोई अप्रिय घटना होती है, तो उनके परिवार को आर्थिक संबल मिल सकेगा। फिलहाल सर्पमित्रों को सरकारी कर्मचारी नहीं माना जाता है। गणेश नाईक ने कहा कि विभागीय स्तर पर इस बात पर गंभीरता से चर्चा चल रही है कि उन्हें ‘अधिकृत सेवक’ का दर्जा कैसे दिया जाए। इससे उन्हें भविष्य में सरकारी सुविधाओं और मानधन का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो सकता है।


