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प्रेरक प्रसंग: योग्यता छिपती नहीं

एक बार अवंती के राजा बाहुबलि को अपने राज्य के लिए राज ज्योतिषी की आवश्यकता थी। समस्त राज्य में यह घोषणा कर दी गई। अनेक ज्योतिषी आए। राजा ने पहले ज्योजिषी से प्रश्न किया – ‘आप भविष्य कैसे बतलाते हैं, महाशय?’ ज्योतिषी ने कहा – ‘नक्षत्र देखकर।’ दूसरे ज्योतिषी से यही प्रश्न किया गया। उसने कहा- ‘मैं कुंडली देखकर बता सकता हूं कि अमुक प्यक्ति की स्थिति क्या रहेगी।‘ तीसरे ज्योतिषी ने कहा- ‘मैं तो हस्त रेखाएं देखकर व्यक्ति के भविष्य का आकलन करता हूं।’

राजा ने सबकी बात सुनी, लेकिन उन्हें संतोष नहीं हुआ। अचानक उन्हें उन्हीं के राज्य में लब्ध प्रतिष्ठित ज्योतिषी की याद आई। वे विष्णु शर्मा थे। उन्होंने तुरंत विष्णु शर्मा को बुलावा भेजा। राजा बाहुबलि ने पूछा – ‘महाशय! आपको तो पता होगा ही कि हमने राज ज्योतिषी के लिए घोषणा की थी, आप क्यों नहीं आए?‘ विष्णु शर्मा ने कहा – ‘मैं अपना भविष्य जानता था कि मैं ही राज ज्योतिषी बनूंगा, इसीलिए मैंने इस पद के लिए कोई आवेदन नहीं किया। मैं जानता था कि जितने भी ज्योतिषी आ रहे हैं, वे अपना ही भविष्य नहीं जानते, भला वे राज्य का भविष्य कैसे बतलाएंगे ?’ यह सुनकर राजा अत्यन्त प्रभावित हुए और उन्हें राज ज्योतिषी के पद पर नियुक्त कर लिया।

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