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Mirzapur : नारघाट का ‘खामोश गवाह’ फिर सुनाएगा मीरजापुर के स्वर्णिम व्यापारिक दिनों की कहानी

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Mirzapur: The ‘Silent Witness’ of Narghat to Retell the Story of Mirzapur’s Golden Era of Trade

मीरजापुर : (Mirzapur) उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले में गंगा किनारे स्थित नारघाट (banks of the Ganges in Mirzapur district, Uttar Pradesh) पर वर्षों से उपेक्षित खड़ा ब्रिटिशकालीन दर-स्तम्भ अब फिर से चर्चा में है। कभी व्यापारिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण साक्षी रहा यह ऐतिहासिक स्तम्भ जल्द ही नए स्वरूप में नजर आएगा। नगर पालिका परिषद (Municipal Council) ने इसके संरक्षण, सौंदर्यीकरण और पुनरुद्धार की तैयारी शुरू कर दी है।

शोधकर्ताओं की एक टीम पिछले दो वर्षों से मीरजापुर की ऐतिहासिक धरोहरों, पुराने घाटों और व्यापारिक मार्गों (Mirzapur’s historical heritage, ancient ghats, and trade routes) पर अध्ययन कर रही है। इसी दौरान नारघाट पर स्थित यह दुर्लभ दर-स्तम्भ प्रमुखता से सामने आया। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्तम्भ पर अंकित दर-सूची उस दौर की व्यापार व्यवस्था, घाट प्रबंधन और राजस्व प्रणाली की महत्वपूर्ण जानकारी समेटे हुए है।

एक समय मीरजापुर उत्तर भारत के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में गिना जाता था। गंगा के रास्ते होने वाला व्यापार यहां की आर्थिक पहचान था। ऐसे में यह दर-स्तम्भ केवल एक पुरानी संरचना नहीं, बल्कि शहर के गौरवशाली अतीत का जीवंत दस्तावेज माना जा रहा है।

नगर पालिकाध्यक्ष श्याम सुंदर केशरी (Municipal Council Chairman Shyam Sundar Keshari) ने रविवार को बताया कि नगर पालिका की योजना के तहत स्तम्भ का संरक्षण, मरम्मत, प्रकाश व्यवस्था और आसपास के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। इससे न केवल ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित होगी, बल्कि शहर की नई पीढ़ी को भी अपने अतीत से जुड़ने और जानने का अवसर मिलेगा।

स्थानीय इतिहासकारों का मानना है कि यह पहल मीरजापुर की ऐतिहासिक पहचान को नई मजबूती देगी।