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लेफ्टिनेंट जेफ्री बूथबी का पत्र अपनी प्रेमिका के नाम

लेफ्टिनेंट जेफ्री बूथबी की अपनी प्रेमिका एडिथ ऐन्सको से पहली मुलाक़ात तब हुई जब उन्हें रॉयल इंजिनियर्स टनेलर्स की सेवा में भेजा गया। उस वक़्त दोनों ही युवा थे। एडिथ की उम्र महज सत्रह साल थी, जबकि जेफ्री बीसवें वर्ष में चल रहा था। दोनों केवल चार दिन साथ रहे।

डार्लिंग,
8th एस स्टैफोर्डसए,फ्रांस (पोस्टमार्केड 26 जुलाई 1915)

‘फ्रांस के किसी हिस्से में पड़ा एक अकेला सिपाही’ शायद इन्हीं शब्दों में मैं अपनी हालात बयां कर सकता हूं। शायद तुम्हें कोई दूसरा फ्रेंच लड़का मिल गया होगा। मुझे माफ़ कर दो कि इस हाल में भी मैं ऐसा सोच रहा हूं और अकेला महसूस नहीं कर रहा हूं। असल में मैं अपने जीवन में इतना खुश पहले कभी नहीं रहा जितना अब हूं।

मैं इंतजार कर रहा हूं कि हम मिलेंगे और उस पल को फिर से जिएंगे जो हमने मिल कर बिताए थे। मैं ये भी जानता हूं कि तुम मुझे मेरी इस गलती के लिए माफ़ कर दोगी कि मैंने तुम्हारे दिल को दुखाया है।

मैं केवल एक बार जर्मन हमले का शिकार हुआ और इलाज के लिए यहां लाया गया हूं जहां तुम्हारा खत मुझे मिला। खैर,मैं तुम्हे लड़ाई की कुछ बातें बताता हूं। वैसे तो यहां कैम्प में कई परेशानियां होती हैं, लेकिन हम सब बहुत मस्ती भी करते हैं।

हमें एक दूसरे की भाषा भी समझ में नहीं आती लेकिन, इसे समझने की कोशिश करना भी अच्छा लगता है। फिलहाल हमें एक ब्लू बुक दी गई है, जिसकी मदद से हम वाक्य बनाते हैं और उन्हें समझने की कोशिश करते हैं। इन लोगों की सीखने की क्षमता अगर तुम देखोगी तो चौंक जाओगी। मुझे लगता है अभी हमें यहां एक या दो महीने और रहना पड़ेगा।

कामना करता हूं तुम्हारे दिन अच्छे से बीतें।

तुम्हारा जोफ

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