
कुछ लोग होते हैं जमाने में
भीतर की आग से
बाहर की लौ
जलाने में
झोंक देते हैं अपना
सब कुछ
औरों को उजाला
दिलाने में।
ऐसा ही एक “लाल” था
किया जिसने कमाल था
दिया था नारा
” जय जवान जय किसान “
बस एक ही उनका
सवाल था
जो हल चलाता है
अन्न उगाता है
औरों का पेट भरता है
वही अपने बच्चों को
धरती पर सुलाकर
आसमां क्यो ओढाता है
क्यूँ खाली होता है
उसका घर और पेट
क्या वो
किसी और जहाँ से आता है?
ऐसे थे वो शख्स
जो कद के छोटे
और
शख्सियत के बड़े थे
अपने बलबूते पर
अंग्रेजो से लड़े थे।
काश!!
फिर से जन्में
वो इस मिट्टी में
इस बार बनके ” पीला “
महका दे ऊपर से नीचे तक
देश मेरा रंगीला।

गरिमा जैन
स्वतंत्र लेखिका
बैंगलुरू में निवास


