spot_img

Kolkata : पश्चिम बंगाल में 25 हजार 753 शिक्षकों की नियुक्ति रद्द होने पर ममता बनर्जी पर तीखा हमला

कोलकाता : (Kolkata) पश्चिम बंगाल में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें 2016 में पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (West Bengal School Service Commission) (डब्ल्यूबीएसएससी) द्वारा की गई 25 हजार 753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मियों की नियुक्तियां रद्द कर दी गई थीं।

कलकत्ता उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने 22 अप्रैल 2024 को यह नियुक्तियां इसलिए रद्द कर दी थीं क्योंकि चयन प्रक्रिया में भ्रष्टाचार इतना व्यापक था कि असली और फर्जी अभ्यर्थियों की पहचान संभव नहीं थी। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की सुप्रीम कोर्ट बेंच ने इस आदेश को बरकरार रखा।

इस फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी और वाम दलों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। माकपा के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ योग्य उम्मीदवार भी इस फैसले की चपेट में आ गए हैं, लेकिन चयन प्रक्रिया में इतना व्यापक भ्रष्टाचार था कि पूरे पैनल को रद्द करना ही एकमात्र विकल्प था।”

भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने ममता सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “राज्य सरकार ने उन अयोग्य लोगों को बचाने की पूरी कोशिश की, जिन्होंने पैसे देकर नौकरी हासिल की थी। अब इस घोटाले के कारण असली उम्मीदवार भी प्रभावित होंगे। मुख्यमंत्री को इस भ्रष्टाचार की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।”

तृणमूल कांग्रेस के नेता और मिजोरम के महाधिवक्ता बिस्वजीत देब ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार को इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “कानूनी सिद्धांत कहता है कि हजार दोषी बच जाएं, लेकिन एक भी निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए। लेकिन इस फैसले के कारण अब असली उम्मीदवार भी प्रभावित हो रहे हैं।”

हालांकि, बिकाश रंजन भट्टाचार्य का मानना है कि पुनर्विचार याचिका दायर करने से केवल मामले में देरी होगी और सार्वजनिक धन की बर्बादी होगी।

Explore our articles