कोलकाता : 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले पटना में हो रही कांग्रेस तृणमूल समेत 17 विपक्षी दलों की बैठक के मंच पर भी तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने राज्य के राज्यपाल डॉ सी वी आनंद बोस पर हमला बोला। इसके साथ ही भाजपा नीत केंद्र सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
बैठक के बाद ममता ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ”पश्चिम बंगाल दिवस” आयोजन और ”कुलपति की नियुक्ति” का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल केंद्र सरकार का प्रतिनिधि होता है। परिणामस्वरूप, उनकी गतिविधियों को केंद्र सरकार द्वारा तय किया जाता है।
शुक्रवार को पटना में विपक्षी गठबंधन बनाने के मकसद से हुई बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता ने सीधे तौर पर शिकायत की कि राजभवन से ”समानांतर सरकार” चल रही है। राज्यपाल केंद्र में सत्तारूढ़ दल भाजपा के अधीन चल रहे हैं। मुख्यमंत्री ममता के अनुरोध को नजरअंदाज करते हुए बोस ने पिछले मंगलवार को राजभवन में ”पश्चिम बंगाल दिवस” मनाया था। उस विषय को उठाते हुए ममता ने कहा, “हमने पश्चिम बंगाल से भी किसी ”पश्चिम बंगाल दिवस” के बारे में नहीं सुना है। उन्होंने यह दिवस मनाया है!” मुख्यमंत्री ने राज्यपाल बोस पर उनका नाम लिए बिना अनुमति कुलपति नियुक्त करने का भी आरोप लगाया।
ममता ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा ईडी-सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर उन्हें शर्मिंदा करने की कोशिश कर रही है। ममता ने कहा कि केंद्र के पास कोई विकल्प नहीं है तो विपक्ष के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
ममता ने यह भी आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने 100 दिन की कार्य योजना सहित विभिन्न क्षेत्रों में पश्चिम बंगाल का पैसा रोक दिया है।
भाजपा सरकार के दौरान देश के वित्तीय संकट, महिलाओं और दलितों पर अत्याचार और इतिहास से छेड़छाड़ को लेकर चेतावनी के बाद बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा, ”अगली बार (2024 के लोकसभा चुनाव में) अगर भाजपा सत्ता में वापस आती है तो देश में चुनाव नहीं होंगे।”


