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Kanpur : मेरी किलकिलारियों को कैद करने वालों को कभी माफ नहीं करेगी जनता : नीलिमा कटियार

पूर्व मंत्री प्रेमलता कटियार ने ढाई वर्ष की बेटी के साथ जेल में झेला था आपातकाल का दंश

कानपुर : देश का काला अध्याय कहा जाने वाले आपातकाल को जनता कभी भूल नहीं पाएगी और इसको तो मैंने ढाई वर्ष की उम्र में झेला है। उस समय जब मेरी मां प्रेमलता कटियार आपातकाल का विरोध कर रही थी तो पुलिस ने मां के साथ मुझे भी जेल में डाल दिया। जेल में मेरी किलकारियों को जिस सत्ता ने कैद किया है उसको देश की जनता कभी माफ नहीं कर पाएगी।

यह बात शनिवार को आपातकाल को याद करते हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रेमलता कटियार की विधायक बेटी नीलिमा कटियार ने कही।

उन्होंने बताया कि अनियमितताओं के कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का चुनाव निरस्त कर दिया। इस प्रकार अपने हाथ से सत्ता फिसलती देखकर उन्होंने देश में 25 जून 1975 की आधी रात को आपातकाल की घोषणा कर दी और सभी नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीन लिया। साथ ही प्रेस पर भी सेंसर लगा दिया और सभी गैर कांग्रेसी नेताओं को एक-एक करके जेल में कैद कर दिया जाने लगा। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह सबसे विवादस्पद काल था। आपातकाल का समय 21 मार्च 1977 तक चलता रहा।

इस आपातकाल का गैर कांग्रेसी दलों के नेता बराबर विरोध कर रहे थे और उनको जेल में डाला जा रहा था। उस दौरान मेरी मां प्रेमलता कटियार ने भी आपातकाल का जबरदस्त विरोध किया तो पुलिस ने उनके साथ मुझे भी जेल में डाल दिया। उस दौरान मेरी उम्र महज ढाई वर्ष थी और जेल में कैद अपनी किलकारियों को कभी नहीं भूल सकती। यही नहीं देश की जनता भी ऐसी सत्ता को कभी नहीं माफ करेगी और हुआ भी ऐसा। महज दो साल बाद जब चुनाव हुआ तो देश की जनता ने कांग्रेस को 150 सीट पर समेट दिया और उनकी सत्ता चली गई। यही नहीं आज का जो मोदी और योगी का दौर चल रहा है जिसमें सभी लोगों को साथ लेकर चला जा रहा है तो ऐसी सत्ता की वापसी तो दूर दूर तक नहीं दिख रही है।

सेनानियों के निकाले गये नाखून

भाजयुमो प्रदेश उपाध्यक्ष डॉक्टर शिवबीर सिंह भदौरिया ने बताया कि लोकतंत्र सेनानियों को जेल में अनेकों यातनाएं दी गई और बहुत से सेनानियों के हाथों की उंगलियों के नाखून तक निकाल लिए गए। लेकिन लोकतंत्र सेनानियों ने हार नहीं मानी लोकतंत्र को जीवित रखने के लिए लोकतंत्र सेनानियों ने छोटी-छोटी टोलियां बनाकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों के नेतृत्व में सभी लोकतंत्र सेनानियों के परिवार वालों की दैनिक आवश्यकताएं एवं शिक्षा व्यवस्था सुचारू रूप से चले, इसकी चिंता करते हुए रात दिन सहयोग अभियान चलाकर सभी को यथासंभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि आज भारत में लोकतंत्र जीवित है तो उसके पीछे लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवार वालों की चिंता करने वाले स्वयंसेवकों का महत्वपूर्ण योगद योगदान है।

प्रेमलता और नीलिमा ने कल्याणपुर को बनाया गढ़

आपातकाल में सक्रिय रही प्रेमलता कटियार की पहचान तेज तर्रार भाजपा नेत्रियों में होने लगी। इसके बाद कल्याणपुर विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ा और लगातार पांच बार विधायक रहीं। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बनी। उम्र को देखते हुए उन्होंने अपनी बेटी नीलिमा कटियार को आगे बढ़ाया। हालांकि उन्होंने नीलिमा को राजनीति के गुर अपने कार्यकाल में ही देने लगी और 1993 में जब कानपुर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ तो वे विद्यार्थी परिषद से जुड़ गईं। छात्र जीवन में कई पदों पर रहीं। 2010 में महिला मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी की सदस्य बनीं। जिले में भी महिला मोर्चे में दायित्व संभाले। उनकी सक्रियता पार्टी के शीर्ष नेताओं तक चर्चित थी इसलिए जब पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने नई दिल्ली में वीरांगना सम्मेलन कराया था तो उन्हें उसमें खास जिम्मेदारी दी गई थी। 2013 में नीलिमा भाजपा की जिला महामंत्री बनीं और वर्ष 2018 में उनकी संगठन क्षमता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें प्रदेश महामंत्री का दायित्व सौंप दिया। इससे पहले 2017 में वह अपनी मां प्रेमलता कटियार की परंपरागत सीट से जीतकर पहली बार विधायक बनी और योगी सरकार में राज्य मंत्री का पद भी मिला। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में दोबारा कल्याणपुर सीट से विधायक बनी। इस प्रकार 2012 को छोड़कर लगातार सात बार से मां और बेटी कल्याणपुर सीट से प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

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