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Jaipur : प्रोफेसर सिंघल की भौतिकी को काव्य रूप में दर्शाती पुस्तक राग -भौतिकी की प्रथम प्रति राज्यपाल को भेंट

जयपुर : राजस्थान विश्वविद्यालय भौतिक शास्त्र विभाग के वरिष्ठ शिक्षक प्रो. ऋषि कुमार सिंघल की भौतिक शास्त्र जैसे सामान्य रूप से जटिल समझे जाने वाले विषय को हिंदी की सरल कविताओं के माध्यम से दर्शाती पुस्तक राग-भौतिकी की प्रथम प्रति राजभवन में राज्यपाल कलराज मिश्र को भेंट की गयी। इस पुस्तक में भौतिक विज्ञान को आमजन के बीच लोकप्रिय किए जाने के उद्देश्य से भौतिक शास्त्र विषय की जटिलता को दूर करने के भाव से हिंदी की सरल कविताओं के रूप में पेश किया गया है।

इस पुस्तक में ब्लैक होल, मैग्नेटिक लैविटेशन, सौर पवन लाल बौने, गैलेक्सी, महा विस्फोट, स्ट्रिंग सिद्धांत, सापेक्षिकता, साइक्लोट्रॉन, क्ष-किरण विवर्तन, विभेदन क्षमता, विक्षेपण क्षमता, दृश्य स्पेक्ट्रम अवरक्त स्पेक्ट्रम, पराबैंगनी स्पेक्ट्रम, ओजोन परत, पराश्रव्य तरंगें जैसे विषयों को सम्मिलित किया गया है, और उनको रोचक कविताओं से समझाया गया है।

इस क्रम में डॉ. सिंघल की तीन पुस्तकों काव्य भौतिकी, गीत भौतिकी, एवं सुर भौतिकी का प्रकाशन हो चुका है। पुस्तक काव्य भौतिकी को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा सर्जना पुरस्कार दिया गया है तथा श्रीनाथद्वारा साहित्य मंडल द्वारा डॉ. सिंघल को इस अभिनव कार्य के लिए भौतिकी काव्य निधि रत्न पुरस्कार से पुरस्कृत किया जा चुका है।

इसी श्रंखला में अब चौथी भौतिक विज्ञान की कविताओं की पुस्तक राग भौतिकी का हाल ही में प्रकाशन वैज्ञानिक दृष्टिकोण समिति एवं जयपुर पब्लिशिंग हाउस जयपुर द्वारा किया गया है। इस पुस्तक में भौतिक विज्ञान के विभिन्न विषयों पर 54 कविताएं लिखी गई हैं जिनका स्पेक्ट्रम बहुत ही विस्तृत एवं रोचक है। पुस्तक की भूमिकाएं सीएसआईआर के पूर्व डायरेक्टर जनरल डॉ. शेखर मांडे तथा नालंदा विश्वविद्यालय के चांसलर भारत के पहले सुपर कंप्यूटर के सूत्रधार डॉ. विजय भटकर ने लिखी हैं।

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