जयपुर : फर्जी फर्म का संचालन और प्रबंधन करने वाले सिंडिकेट के खिलाफ निरंतर अभियान के तहत जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (डीजीजीआई) जयपुर जोनल यूनिट ने दिल्ली स्थित एक बड़े अपराध सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। यह सिंडिकेट 569 फर्जी फर्मों का संचालन कर रहा था और उनके माध्यम से 1,047 करोड़ रुपये की भारी धोखाधड़ी वाली आईटीसी बनाई थी।
मास्टरमाइंड ऋषभ जैन निवासी दिल्ली ने इन फर्जी फर्मों को संचालित करने के लिए दस कर्मचारियों को काम पर रखा था। व्यापक रेकी और डेटा विश्लेषण के बाद डीजीजीआई, जयपुर के अधिकारी दिल्ली में इस मास्टरमाइंड का पता लगाने में सक्षम हुए और उसे पकड़ लिया। कार्यप्रणाली से संकेत मिलता है कि सिंडिकेट का फर्मों, बैंक खातों,सिम कार्डों को खरीदने, उनके आरटीजीएस,नकद हस्तांतरण का प्रबंधन करने और उनके और लाभार्थी फर्मों के बीच मध्यस्थता करने के लिए विभिन्न दलालों के साथ घनिष्ठ संबंध है। ऐसे दलाल,एजेंट हैं जो गरीब, जरूरतमंद और अतिसंवेदनशील लोगों की आईडी का उपयोग करके जीएसटीएन पर फर्मों को पंजीकृत करने में माहिर हैं और इन पंजीकृत फर्मों को सिंडिकेट को बेचते हैं। जो आगे उनके माध्यम से नकली चालान जारी करते हैं। इस सिंडिकेट ने 6,022 करोड़ रुपये के कर योग्य कारोबार वाले चालान जारी किए हैं, जिसमें का 1,047 करोड़ का आईटीसी शामिल है। जो इन 569 फर्जी फर्मों के माध्यम से 2 हजार से अधिक लाभार्थी फर्मों को दिए गए। अधिकांश फर्जी कंपनियां दिल्ली में स्थित हैं और 13 अन्य राज्यों राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार, झारखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, गोवा, असम और उत्तराखंड में भी मौजूद हैं। अब तक सिंडिकेट और दलालों द्वारा इस्तेमाल किए गए 73 बैंक खाते जब्त किए जा चुके हैं।आरोपित ऋषभ जैन को को गिरफ्तार किया गया और आर्थिक अपराध न्यायालय, जयपुर के समक्ष पेश किया गया और जहां आरोपित को सात जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।


