जयपुर : राज्य के समस्त नगरीय क्षेत्रों में स्थित बहुमंजिला भवनों में पेयजल कनेक्शन के लिए बनाई गई नीति की अधिसूचना जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने जारी कर दी है।
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री डॉ. महेश जोशी ने प्रदेश की बहुमंजिला इमारतों के विकास कर्ताओं एवं रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों से अपील की है कि वे संबंधित अधीक्षण अभियंता कार्यालय में पेयजल कनेक्शन के लिए जल्दी से जल्दी आवेदन करें ताकि मल्टीस्टोरी बिल्डिंग्स में रहने वालों को पेयजल उपलब्ध हो सके।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्ष 2023-24 के बजट में शहरी क्षेत्रों में बहुमंजिला भवनों को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की योजनाओं से पेयजल कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए घोषणा की थी।
उल्लेखनीय है कि बहुमंजिला भवनों में पीएचईडी द्वारा पेयजल कनेक्शन दिए जाने के संबंध में कोई स्पष्ट नीति नहीं होने के कारण इन भवनों के रहवासी लम्बे समय से पेयजल कनेक्शन के लिए इंतजार कर रहे थे।
जल कनेक्शन नीति के अनुसार बहुमंजिला भवनों को जल कनेक्शन देने की यह नीति पूरे राजस्थान के सभी नगरीय क्षेत्रों में समान रूप से लागू होगी। आर.डब्ल्यू.ए. (रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन/अन्य संस्था/समिति)/ विकासकर्ता द्वारा आवासीय बहुमंजिला भवन में पेयजल सम्बन्ध के लिए सम्बन्धित अधीक्षण अभियंता कार्यालय में आवेदन किया जाएगा। आवेदन के साथ बहुमंजिला भवन का सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदित मानचित्र जिसमें भवन में निर्मित समस्त इकाइयों की श्रेणी (आवासीय/वाणिज्यक) तथा इकाईवार कारपेट एरिया दर्शित हो, प्रस्तुत किया जाएगा। बहुमंजिला भवन की श्रेणी में वे भवन आएंगे जिनकी ऊंचाई भवन के कुर्सी स्तर से एवं भवन में भू-तल स्टिल्ट अथवा पोडियम पर होने की स्थिति में स्टिल्ट फ्लोर की छत/पोडियम स्तर से पंद्रह मीटर से अधिक हो।
इसके अलावा बहुमंजिला भवनों में घरेलू पेयजल मांग की गणना 1500 वर्ग फीट कारपेट एरिया तक के फ्लैट में 5 व्यक्ति प्रति फ्लैट तथा 1500 वर्ग फीट से अधिक कारपेट एरिया के फ्लैट में 7 व्यक्ति प्रति फ्लैट के अनुसार की जाएगी। एकमुश्त शुल्क की गणना बहुमंजिला भवन के कुल कारपेट एरिया के आधार पर की जाएगी। पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जलदाय विभाग द्वारा तैयार कराए जाने वाले के लिए बुनियादी ढ़ांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) की हिस्सा राशि एकमुश्त शुल्क के रूप में ली जाएगी। बहुमंजिला भवनों में पेयजल सम्बन्ध के लिए ‘एकमुश्त शुल्क‘ की न्यूनतम 25 प्रतिशत राशि आर.डब्ल्यू.ए. (रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन/अन्य संस्था/समिति)/ विकासकर्ता द्वारा पेयजल सम्बन्ध जारी करते समय जमा कराई जाएगी। एकमुश्त शुल्क राशि का शेष 75 प्रतिशत जल उपभोग बिल के साथ 60 समान किस्तों में 9 प्रतिशत प्रति वर्ष साधारण ब्याज के साथ देय होगा। उपभोक्ता द्वारा ‘एकमुश्त शुल्क‘ की राशि एक साथ जमा कराने पर कुल एकमुश्त राशि पर 5 प्रतिशत की छूट देय होगी।
बहुमंजिला भवन में पेयजल सम्बन्ध आर.डब्ल्यू.ए. (रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन/अन्य संस्था/समिति)/विकासकर्ता को पेयजल उपयोग के लिए घरेलू एवं अघरेलू पेयजल मांग की गणना अनुसार पृथक-पृथक एकल बल्क पेयजल सम्बन्ध भू-तल पर जारी किया जाएगा। इसके अतिरिक्त किसी भी ईकाई/फ्लैट के मालिक को अलग से पेयजल कनेक्शन नहीं दिया जाएगा।
बहुमंजिला भवन का कुल कारपेट एरिया राजस्थान रियल एस्टेट रेगूलेटरी ऑथोरिटी /नगर निकाय/नगर विकास न्यास/विकास प्राधिकरण/राज्य सरकार अथवा इनके द्वारा अन्य अधिकृत सक्षम प्राधिकारी/नगरीय विकास विभाग अथवा स्वायत्त शासन विभाग से पंजीकृत पैनल वास्तुविद् द्वारा बहुमंजिला भवन के अनुमोदित मानचित्र में दर्शित सभी फ्लैटस्/ईकाईयों के कारपेट एरिया का कुल योग होगा।
नई जल कनेक्शन नीति में बहुमंजिला भवनों के लिए एकमुश्त शुल्क की दरें भी निर्धारित कर दी गई हैं। उपर्युक्त प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित आवासीय बहुमंजिला भवन के कुल कारपेट एरिया पर 25 रुपये प्रति वर्ग फुट, वाणिज्यिक (कॉमर्शियल) बहुमंजिला भवन के कुल कारपेट एरिया पर 42 रुपये प्रति वर्ग फुट तथा मिश्रित बहुमंजिला भवन में आवासीय क्षेत्र के कुल कारपेट एरिया पर 25 रुपये प्रति वर्ग फुट तथा वाणिज्यिक क्षेत्र के कुल कारपेट एरिया पर 42 रुपये प्रति वर्ग फुट शुल्क तय किश गया है। बहुमंजिला संस्थागत अथवा औद्योगिक भवनों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए हिस्सा राशि विभागीय बुनियादी ढ़ांचे की वास्तविक लागत की पूर्ण राशि देय होगी।
वहीं बहुमंजिला भवन में रूफटॉप वर्षा जल संचयन प्रणाली (वॉटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर) कार्यात्मक होने पर एकमुश्त शुल्क में 5 प्रतिशत, ’’अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग प्रणाली’’ कार्यात्मक होने तथा बहुमंजिला भवन की न्यूनतम 10 प्रतिशत जल मांग की आपूर्ति पुनः उपयोग प्रणाली से किये जाने की स्थिति में एकमुश्त शुल्क में 5 प्रतिशत तथा ’सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट’ स्थापित कर अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग प्रणाली कार्यात्मक होने तथा बहुमंजिला भवन की न्यूनतम 20 प्रतिशत जल मांग की आपूर्ति पुनः उपयोग प्रणाली से किये जाने की स्थिति में एकमुश्त शुल्क में 5 प्रतिशत की छूट देय होगी।
समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग एवं अल्प आय वर्ग को विशेष तौर पर लाभान्वित करने के लिए मुख्यमंत्री जन आवास योजना/अफोर्डेबल हाउसिंग परियोजना में निर्मित बहुमंजिला आवासीय भवनों में (ई.डब्ल्यू.एस./एल.आई.जी.) फ्लैट्स में पेयजल सम्बन्ध के लिए विभागीय बुनियादी ढ़ांचे की हिस्सा राशि के रूप में देय एकमुश्त शुल्क की राशि में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
उपरोक्त छूट उपरांत इस श्रेणी के लिए देय एक मुश्त शुल्क में से 25 प्रतिशत राशि परियोजना विकासकर्ता द्वारा पेयजल सम्बन्ध से पूर्व जमा करानी होगी तथा शेष 75 प्रतिश त राशि इस श्रेणी के आवासीय भवन धारकों द्वारा मासिक जल शुल्क के साथ 60 समान किश्तों में 9 प्रतिशत प्रतिवर्ष साधारण ब्याज के साथ देय होगी।
उक्त श्रेणी के अंतर्गत आवासीय भवन (ई.डब्ल्यू.एस./एल.आई.जी.) जिनको विकासकर्ता द्वारा निर्मित कर समस्त आवासीय इकाइयों को क्रेतागण को हस्तान्तरित किया जा चुका है, पर देय एक मुश्त शुल्क की 25 प्रतिशत राशि परियोजना विकासकर्ता के स्थान पर आर.डब्ल्यू.ए. (रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन/अन्य संस्था/समिति) द्वारा भी जमा कराई जा सकती है।
बहुमंजिला भवनों के लिए जल शुल्क एवं अन्य शुल्क जैसे कि स्थायी शुल्क/सम्बन्ध शुल्क/मीटर शुल्क इत्यादि प्रचलित टैरिफ की सम्बन्धित श्रेणी के अनुसार ही देय होगा।
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री जोशी ने बताया कि बहुमंजिला भवनों में पेयजल सम्बन्ध वरीयता से जारी किये जाएंगे। पहली वरीयता में ऐसे क्षेत्र जहां बहुमंजिला भवनों की पेयजल मांग की पूर्ति के लिए स्त्रोत तथा बुनियादी ढांचा पर्याप्त रूप से उपलब्ध है। दूसरी वरीयता में ऐसे क्षेत्र जहां बहुमंजिला भवनों की मांग की पूर्ति के लिए स्त्रोत पर्याप्त हैं, परन्तु स्थापित वितरण तंत्र में संवर्धन की आवश्यकता है। ऐसे क्षेत्रों में एकमुश्त शुल्क का न्यूनतम 25 प्रतिशत राशि जमा करवाने पर उपभोक्ताओं को तात्कालिक राहत के लिए विभाग द्वारा फिजीबिलिटी के आधार पर एक जलसंबंध दिया जा सकेगा। तीसरी वरीयता में ऐसे क्षेत्र जहां स्त्रोत पर्याप्त हैं, परन्तु वितरण तंत्र में संवर्धन उपरान्त सम्बन्ध दिया जा सकता है। चौथी वरीयता में ऐसे क्षेत्र जहां स्त्रोत पर्याप्त हैं, परन्तु बुनियादी ढ़ांचे में वितरण तंत्र के साथ साथ भण्डारण क्षमता/ट्रांसमिशन मैन लाइन के संवर्धन कार्य भी आवश्यक है। पांचवीं वरीयता में ऐसे क्षेत्र जहां स्त्रोत अपर्याप्त हैं तथा स्त्रोत का संवर्धन भी आवश्यक है।
जोशी ने बताया कि कनेक्शन देते समय आवासीय बहुमंजिला भवनों को पहली प्राथमिकता, वाणिज्यिक बहुमंजिला भवनों को दूसरी तथा संस्थानिक अथवा औद्योगिक बहुमंजिला भवनों को तीसरी प्राथमिकता दी जाएगी। बहुमंजिला भवनों में विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गये जल का उपयोग केवल घरेलू पेयजल आवश्यकताओं के लिए किया जाएगा। पेयजल का उपयोग अन्य कार्यों यथा वाहनों को धोने के लिए/विनिर्माण गतिविधियों के लिए/सड़कों व मार्गों को साफ करने के लिए/भवन निर्माण/स्वीमिंग पूल/उद्यान इत्यादि के लिए नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा बहुमंजिला भवनों में पेयजल सम्बन्ध जारी करने से पूर्व ‘माडॅल राजस्थान भवन विनियम – 2020‘ के प्रावधानों तथा समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा संशोधित एवं तत्समय प्रभावी विनियम के अनुसार वर्षा जल संचयन, अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग प्रणाली तथा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण एवं कार्यात्मक होना अनिवार्य होगा।


